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यूके, यूएस, यूरो नहीं दुनिया पहनेगी अब भारतीयों के आकार का जूता

by यूनिक समय • October 8, 2022
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यूके, यूएस, यूरो नहीं दुनिया पहनेगी अब भारतीयों के आकार का जूता

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मीट एट आगरा
एक लाख लोगों पर सर्वे के बाद फुटवियर की दुनिया में भारतीयों का साइज मान्य, फुटवियर ट्रेड फेयर में 45 देश 225 स्टालों पर अपने प्रोडक्ट‌्स का प्रदर्शन कर रहे, ब्राजील, अर्जेंटीना, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, ताइवान, चीन आदि देशों के एक्जीबिटर्स आए, ‘हाई वैल्यू’ के उत्पादों की योजना बनाएंगे भारतीय उद्यमी, जिससे नई पहचान मिले, इटली की तर्ज पर आयोजित इस फेयर को भारतीय कारोबारियों की मिली है सराहना

दुनिया अब यूके, यूएस और यूरो नहीं बल्कि भारतीयों के आकार का जूता पहनेगी। एक लाख लोगों पर सर्वे के बाद फुटवियर की दुनिया में भारतीयों का जूता साइज मान्य हो गया है। आगरा में आयोजित फुटवियर ट्रेड फेयर मीट एट आगरा में 45 देशों के उद्यमियों के बीच जब यह बात रखी गई तो पूरा हाल तालियों से गूंज उठा। यहां 225 स्टालों पर विभिन्न देशों के उद्यमी अपने प्रोडक्ट‌्स का प्रदर्शन कर रहे हैं। ब्राजील, अर्जेंटीना, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, ताइवान, चीन आदि देशों के एक्जीबिटर्स के बीच कहा गया कि भारतीय उद्यमी अब ‘हाई वैल्यू’ के उत्पादों की योजना बनाएंगे जिससे बाजार में उनके उत्पादों को नई पहचान मिले। इटली की तर्ज पर आगरा में आयोजित इस फेयर को दुनिया भर के कारोबारियों की सराहना मिल रही है।
फुटवियर में हम मौजूदा कारोबार को दस गुना बढ़ा सकते हैं। आगरा का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निर्यात पांच हजार करोड़ रुपये से बढ़ कर 50 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है। बशर्ते इसके लिए जरूरी आत्मविश्वास लाया जाए। आत्मनिर्भरता लाई जाए। गुणवत्ता और मानकों का पूरा ध्यान रखा जाए। आगरा मथुरा रोड पर सींगना स्थित आगरा ट्रेड सेंटर के कॉन्फ्रेंस हॉल में मीट एट आगरा के 14 वें संस्करण के शुभारंभ अवसर को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह बात रखी। उन्होंने कहा कि फुटवियर की आपूर्ति चेन में जो भी कॉम्पोनेंट आयात होते हैं, उनको क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से भारत में ही बनाना होगा। लेदर फुटवियर से आगे बढ़कर नॉन लेदर फुटवियर की ओर कदम बढ़ाना होगा। कामगारों की सेहत और सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। एथिकल प्रेक्टिस अपनानी होगी। जीरो वेस्ट डिस्चार्ज, सॉल्ट फ्री टेनिंग, कार्यस्थलों को हर लिहाज से वैश्विक मानकों के अनुकूल बनाना होगा। यदि ऐसा हुआ तो विश्व का दूसरे नंबर का फुटवियर निर्माता पहली पायदान पर आ सकता है। क्योंकि इसके पास तीन बिलियन वर्ग फुट की लेदर निर्माता टेनरी भी हैं।
इससे पहले एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर ने आगरा की क्षमता और मीट एट आगरा की विकास यात्रा को रखा। मांग रखी कि पर्यावरण को लेकर पूरे देश में एक ही नीति बने। चर्म निर्यात परिषद के अध्यक्ष संजय लीखा ने विभागीय सहयोग लगातार मिलने की बात रखी। पूर्व अध्यक्ष पीआर अकील अहमद ने भविष्य में इस उद्योग को सौगातें मिलते रहने के बारे में कहा। आयोजन में केन्द्रीय विधि एवं कानून राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल प्रदेश के काबीना मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने भी केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाया। विधायक चौ. बाबूलाल ने उद्योगों को सहयोग की बात रखी।

एक हजार जोड़ी में 425 को रोजगार

सात हजार इकाइयों वाली आगरा की फुटवियर इंडस्ट्री दो कारणों से अहम है। एक तो निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित करती है। एवं दूसरा अहम कारण है रोजगार सृजन का। देश भर में इस सेक्टर में 40 फीसदी महिलाएं कार्यरत हैं। आगरा में एक हजार जोड़ी बिकने पर 425 लोगों का रोजगार सृजित होता है।

ब्रांडिंग की जरूरत

जिस तरह से भारतीय फुटवियर ने अपना दखल बढ़ाया है। इस क्षेत्र की कंपनियों को इसकी ब्रांडिंग करनी होगी। ई प्लेटफार्म, रोड शो, ग्लोबल जेवी के माध्यम से इस क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए भारत को इस क्षेत्र में अव्वल बनाना होगा। वैसे भी अब विश्व की बड़ी फुटवियर निर्माता कंपनियां हमारे यहां आकर अपनी उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की बात कह रही हैं। उन्होंने मल्टी स्किलिंग का सुझाव दिया। साथ ही बताया कि मुक्त व्यापार समझौते के तहत शून्य शुल्क का लाभ यूएई में मिलने लगा है। जल्द आस्ट्रेलिया में भी मिलेगा। आने वाले दिनों में और भी मुक्त व्यापार समझौते होंगे।

1700 करोड़ की योजना का लाभ लें

केन्द्रीय मंत्री ने उद्यमियों से 1700 करोड़ की इंडियन फुटवियर एंड लेदर डेवलपमेंट प्रोग्राम स्कीम का लाभ लेने को कहा। इस योजना की अवधि 2026 तक है। यदि इससे जुड़े सुझाव हैं तो वे भी साझा किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कच्चे माल के लिए बड़े ब्रांड भारत पर निर्भर हैं। ऐसी योजना बननी चाहिए जिससे कि वैश्विक बाजार में भारतीय ब्रांड का प्रवेश हो। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग को साथ लेकर कौशल विकास में मदद लेकर नए डिजाइन बनाए जा सकते हैं।

यह रखी गई मांगें

आगरा में मेगा लेदर क्लस्टर स्थापित हो।
पर्यावरण के नियम देश में एक समान हों
फुटवियर के लिए स्पेशल इकोनोमिक जोन
ताज के पीलेपन के साथ आगरा की आर्थिक सेहत

वैराइटी अच्छी है इस बार

45 देशों के 250 स्टॉलों के भ्रमण के बाद उद्यमियों ने उपलब्ध स्टॉक को सराहा। विशेष रूप से कॉम्पोनेंट की नई रेंज से उत्साहित दिखे। हालांकि कच्चा माल महंगा होने के कारण इनके दाम से मायूसी मिली। यही स्थिति मशीनों को लेकर रही। डॉलर की मजबूती ने इनके दाम में इजाफा कर दिया है। हालांकि यूरोप की मशीनें पहुंच में रहीं। कुछ ऐसी मशीनें हैं जिनसे सामान्य डिजाइन के जूते की चार घंटे की उत्पादन प्रक्रिया को दो घंटे में तब्दील किया जा सकता है। चमड़े की वैराइटी को लेकर भी संतोष जताया। आमतौर पर बिकने वाले काफ, बफ, गोट, शीप लेदर नए रूप रंग में दिखे। मेटलिक लुक, क्रस्ट लुक, स्वेड, ऑइली फिनिश, एनलीन फिनिश, वैक्सी फिनिश भी नजर आए।

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