
यूनिक समय, नई दिल्ली। पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर की पदवी से इस्तीफा देने के बाद पहली बार इस पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इसे ईश्वर की इच्छा बताया और कहा कि यह उनके 25 वर्षों की तपस्या का फल था।
ममता कुलकर्णी ने कहा, “महाकुंभ में महामंडलेश्वर बनना मेरे लिए भगवान के आशीर्वाद से हुआ। यह 140 वर्षों में एक अत्यंत पवित्र अवसर था और मेरे लिए एक आध्यात्मिक सम्मान। मेरे जीवन की तपस्या का यह ईश्वरीय परिणाम था।” उन्होंने सांसारिक जीवन को त्यागकर “श्री यमई ममता नंदगिरी” नाम से साध्वी जीवन अपनाया है।
गौरतलब है कि 24 जनवरी 2025 को उन्हें किन्नर अखाड़े की ओर से महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी। लेकिन यह निर्णय अखाड़े के भीतर विवाद का कारण बन गया। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास के बीच मतभेद उभर आए, जिसके चलते ममता ने पद से इस्तीफा दे दिया।
योग गुरु बाबा रामदेव ने ममता को महामंडलेश्वर बनाए जाने की आलोचना करते हुए कहा था कि कोई भी व्यक्ति एक दिन में संत नहीं बन सकता।
बाद में ऋषि अजय दास ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और ममता कुलकर्णी दोनों को किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया। उन्होंने कहा कि त्रिपाठी द्वारा दी गई जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं निभाया गया।
ममता कुलकर्णी, जिन्होंने 1990 के दशक में करण अर्जुन और बाजी जैसी फिल्मों से खासी लोकप्रियता पाई थी, 2000 के दशक की शुरुआत में फिल्मी दुनिया से दूरी बना चुकी हैं और अब वह आध्यात्मिक मार्ग पर हैं।
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