ट्रंप के सीजफायर दावे के बाद भी ईरान ने इज़राइल पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें

ईरान इज़राइल युद्ध

यूनिक समय, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान ने इज़राइल और अमेरिका के ठिकानों पर एक बार फिर मिसाइल हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और गहराता जा रहा है। इन हमलों में इजराइल के तीन नागरिकों की मौत हो गई है। ईरान के इस आक्रामक रुख ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को झूठा साबित कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने ईरान-इजराइल के बीच युद्ध को रोक दिया है।

ईरानी सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामेनेई ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को स्वीकार नहीं करेंगे और अपने हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी कहा है कि अमेरिका के मध्य पूर्व में मौजूद सैन्य अड्डे उनके निशाने पर हैं।

पिछली रात ईरान ने कतर के अल उदीद एयरबेस पर भी मिसाइलें दागीं, जो अमेरिका का एक अहम सैन्य अड्डा है। हालांकि अधिकतर मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर हवा में ही नष्ट कर दिया गया, लेकिन कुछ मिसाइलें अमेरिकी ठिकानों के नजदीक गिरीं। इस बीच कतर, कुवैत, यूएई, इराक और मिस्र समेत करीब 10 देशों ने अपने एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिए थे, जिन्हें बाद में दोबारा खोल दिया गया।

कतर की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि ईरान ने 19 मिसाइलें दागीं, जिनमें से अधिकांश को निष्क्रिय कर दिया गया। एक मिसाइल अमेरिकी अड्डे पर गिरी, जिससे आंशिक क्षति हुई है।

व्हाइट हाउस ने बयान में कहा कि ईरान की ओर से हमले सुलेमानी की मौत के बाद भी जारी हैं, लेकिन इनसे बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। वहीं ट्रंप ने हमलों को “कमजोर” करार देते हुए दावा किया कि 14 मिसाइलों में से 13 को नष्ट कर दिया गया।

इन हालातों के बीच खाड़ी देशों के संगठन जीसीसी (GCC) ने ईरान के हमले की कड़ी निंदा की है और कतर की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में देखा है।

ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी कोई भी आक्रामक कदम उठाते हैं, तो ईरान उसकी पूरी ताकत से जवाब देगा।

मध्य पूर्व एक बार फिर भयंकर संघर्ष की कगार पर खड़ा है। जहां एक ओर अमेरिका और इज़राइल कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय हैं, वहीं ईरान अपने सैन्य विकल्पों को खुलकर इस्तेमाल कर रहा है। आने वाले समय में इस तनाव का क्या रूप होगा, यह अब वैश्विक राजनीति और कूटनीति की दिशा पर निर्भर करता है।

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