
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रयागराज के करछना में 29 जून को हुई हिंसा के बाद पुलिस ने अब तक 50 लोगों को गिरफ्तार किया है और लगभग 600 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, यह हिंसा पूर्व नियोजित थी और उपद्रवियों ने लाठियों, डंडों, पत्थरों और पेट्रोल से भरी बोतलों के साथ हिंसा को अंजाम दिया। करछना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
प्रशासन ने हिंसा में शामिल आरोपियों पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। घटना में जलाई गई गाड़ियों और सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई उपद्रवियों से ही की जाएगी। इस कार्रवाई के लिए पुलिस की 15 टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
हिंसा की पृष्ठभूमि ईसौटा गांव में अप्रैल में हुई एक दलित युवक देवी शंकर की हत्या से जुड़ी है, जिसे जिंदा जलाया गया था। इस मामले में नौ लोग गिरफ्तार हुए थे, जिनमें से आठ ठाकुर और एक तेली समुदाय से थे। देवी शंकर के परिजनों का आरोप है कि अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। वे सरकार से आवास, बच्चों की शिक्षा, पेंशन और सुरक्षा के लिए पांच लाख रुपये की मांग कर रहे हैं।
देवी शंकर के परिजन और गांववाले आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद से मिलने प्रयागराज पहुंचे थे। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए चंद्रशेखर आज़ाद को प्रयागराज सर्किट हाउस में रोक दिया, जिसके बाद उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
करीब 5,000 लोगों की भीड़, जिसमें भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी शामिल थे, ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और निजी वाहनों पर पथराव हुआ, आगजनी की घटनाएं हुईं और कई लोग घायल हो गए। प्रशासन का कहना है कि हालात पर नियंत्रण पा लिया गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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