
यूनिक समय, नई दिल्ली। तिब्बती धर्मगुरु और 14वें दलाई लामा (Tenzin Gyatso), जो जल्द ही 90 वर्ष के होने वाले हैं, ने अपने उत्तराधिकारी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 15वें दलाई लामा का चयन उनकी मृत्यु के बाद ही किया जाएगा। इस प्रक्रिया में चीन की कोई भूमिका नहीं होगी, उन्होंने यह भी दोहराया कि उत्तराधिकारी का जन्म “Free World” यानी स्वतंत्र देशों में होगा, न कि चीन के कब्जे वाले तिब्बत में।
दलाई लामा ने अपने बयान में कहा, “मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरे उत्तराधिकारी के पुनर्जन्म को मान्यता देने का अधिकार केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट (Gaden Phodrang Trust) को है। किसी अन्य सरकार या संस्था को इसमें हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।”
यह ऐलान धर्मशाला में आयोजित एक बौद्ध धार्मिक सम्मेलन के दौरान एक वीडियो संदेश में किया गया। इसके साथ ही दलाई लामा ने अपनी नई पुस्तक “Voice for the Voiceless” में भी उत्तराधिकारी चयन प्रक्रिया और चीन के हस्तक्षेप के खिलाफ अपने विचार साझा किए हैं।
उन्होंने कहा कि वह अभी पूरी तरह स्वस्थ हैं और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार में पूरी तरह सक्षम हैं। लेकिन उत्तराधिकारी को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाने के लिए यह बयान जरूरी था।
दलाई लामा का यह स्पष्ट और साहसिक बयान न केवल तिब्बती समुदाय के लिए मार्गदर्शक है, बल्कि चीन के दावे को खुली चुनौती भी है। उनके अनुसार, आध्यात्मिक परंपरा और विश्वास की रक्षा के लिए उत्तराधिकारी का चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होगा — जिसमें राजनीति की कोई जगह नहीं होगी।
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