
यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में कम संख्या वाले स्कूलों के मर्जर को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका सीतापुर जिले के 51 छात्रों की ओर से दायर की गई थी, जिसमें स्कूल मर्जर पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार द्वारा स्कूलों के समायोजन का निर्णय संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और शैक्षणिक व्यवस्था के सुधार के उद्देश्य से लिया गया है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्णय अवैध नहीं है।
राज्य सरकार ने ऐसे करीब 5000 प्राथमिक स्कूलों की पहचान की है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम है। इन स्कूलों को नजदीकी उच्च प्राथमिक या अन्य विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा और खाली स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा। इस फैसले की घोषणा सरकार ने 16 जून को की थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि स्कूलों के मर्जर से छोटे बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे शिक्षा में बाधा आएगी। उनका यह भी कहना था कि यह निर्णय 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 4 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था और 7 जुलाई को आदेश सुनाया, जिससे प्रदेश में स्कूलों के मर्जर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
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