
यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे करिश्माई और प्रभावशाली कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली आज 8 जुलाई को अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। क्रिकेट फैंस उन्हें ‘दादा’ के नाम से जानते हैं, जिन्होंने भारतीय टीम को न सिर्फ नई पहचान दी, बल्कि उसे विदेशों में भी जीतना सिखाया।
करियर की शुरुआत और शानदार वापसी
सौरव गांगुली ने साल 1992 में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था, लेकिन शुरुआती दौर में टीम से बाहर हो गए। 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में वापसी करते हुए उन्होंने लॉर्ड्स में डेब्यू शतक (131 रन) ठोककर सभी को चौंका दिया। इसके बाद वे टेस्ट टीम के स्थायी सदस्य बन गए।
मुश्किल दौर में मिली कप्तानी
साल 2000 में जब भारतीय क्रिकेट मैच फिक्सिंग जैसे बड़े संकट से जूझ रही थी, उस समय गांगुली को टीम की कमान सौंपी गई। उन्होंने न सिर्फ टीम को संभाला, बल्कि युवराज सिंह, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग और एमएस धोनी जैसे नए चेहरों को टीम में जगह देकर भविष्य की नींव भी रखी।
विदेशों में मिली बड़ी जीतें
गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसी टीमों के खिलाफ विदेशों में यादगार टेस्ट जीत दर्ज कीं। उन्होंने खिलाड़ियों को आक्रामक खेल सिखाया और टीम को आत्मविश्वास से भर दिया।
टॉस विवाद और ऑस्ट्रेलिया को झटका
2001 की ऐतिहासिक भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज में गांगुली ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ को टॉस के लिए इंतजार करवाया था। कोलकाता टेस्ट में भारत ने फॉलोऑन के बावजूद जीत हासिल कर ऑस्ट्रेलिया के 16 मैचों की जीत की लय को तोड़ा। इसके बाद भारत ने सीरीज 2-1 से अपने नाम की।
करियर पर एक नजर
सौरव गांगुली ने अपने करियर में 113 टेस्ट खेले, जिनमें उन्होंने 7212 रन बनाए और 16 शतक जड़े। वहीं, 311 वनडे मुकाबलों में उनके नाम 11363 रन दर्ज हैं, जिसमें 22 शतक और 72 अर्धशतक शामिल हैं।
सौरव गांगुली सिर्फ एक कप्तान नहीं, बल्कि वो किरदार हैं जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी। उनके नेतृत्व में भारत ने निडर होकर खेलना सीखा और एक नई पहचान बनाई। आज उनके 53वें जन्मदिन पर क्रिकेट जगत उन्हें सलाम करता है।
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