
यूनिक समय, नई दिल्ली। केरल की नर्स निमिषा प्रिया, जो पिछले आठ वर्षों से यमन की जेल में बंद हैं, को 2017 में यमनी नागरिक अब्दो मेहदी की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए यमन की सर्वोच्च अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बुधवार को दी जाने वाली फांसी अंतिम क्षणों में टाल दी गई, जिससे उसके परिवार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उसे पूरी तरह माफ़ी मिलेगी या नहीं।
इस बीच अब्दो मेहदी के भाई अब्देलफत्ताह मेहदी के हालिया बयान ने मामले में एक बार फिर अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि जिस तरह का अपराध निमिषा ने किया है, उसके लिए माफी नहीं दी जा सकती।
यमन में इस समय विभिन्न सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधि, अब्दो मेहदी के परिवार से बातचीत कर रहे हैं, ताकि फांसी की सजा को टालने या माफ़ करने का रास्ता निकाला जा सके। चूंकि शरिया कानून के तहत, मृतक के परिवार को ‘ब्लड मनी’ यानी आर्थिक मुआवज़ा देकर क्षमा प्राप्त की जा सकती है, इसलिए अब ध्यान ब्लड मनी पर समझौते की ओर केंद्रित हो गया है।
केरल के माकपा राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने जानकारी दी है कि सजा पर फिलहाल रोक लगी हुई है और सरकार समेत कई लोग इस मामले को मानवीय आधार पर सुलझाने के लिए प्रयासरत हैं। भारतीय सरकार भी इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से देख रही है, वहीं केरल के उद्योगपति एम ए यूसुफ अली ने ज़रूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता देने की बात कही है।
फिलहाल निमिषा की किस्मत का फैसला, अब्दो मेहदी के परिवार के रुख और ब्लड मनी पर समझौते पर निर्भर करता है।
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