
रीवा: मध्य प्रदेश की कुख्यात ‘मौत की घाटी’ यानी सोहागी घाटी में अब आप सड़क हादसों की भयावहता को सिर्फ सुनेंगे नहीं, बल्कि देख भी सकेंगे! रीवा पुलिस ने एक अनोखा और चौंकाने वाला प्रयोग किया है – यहां हुए भीषण सड़क हादसों के क्षतिग्रस्त वाहनों को घाटी के किनारे टांग दिया गया है। उद्देश्य एकदम साफ है – लोगों को आंखों देखी चेतावनी देना, ताकि वे संभल कर गाड़ी चलाएं और अपनी जान की कीमत समझें।
रीवा को प्रयागराज से जोड़ने वाले NH-30 पर स्थित सोहागी घाटी वर्षों से सड़क हादसों की भयंकर गवाह रही है। 8 किलोमीटर लंबी इस पहाड़ी सड़क को स्थानीय लोग अब ‘मौत की घाटी’ और ‘खूनी रास्ता’ कहकर बुलाने लगे हैं।
रीवा पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह के निर्देश पर घाटी के दो सबसे खतरनाक मोड़ों पर चारपहिया एक्सीडेंटल वाहनों को क्रेन से टांगा गया है। SDOP उदित मिश्रा ने बताया कि इन जले-कटे और चकनाचूर हो चुके वाहनों को देखकर हर गुजरने वाला यात्री सतर्क हो जाएगा और तेज रफ्तार या लापरवाही से बचने का संदेश स्वतः मिल जाएगा।
वाहन नहीं, चेतावनी के बोर्ड हैं ये ये क्षतिग्रस्त वाहन अब किसी बोर्ड की तरह काम कर रहे हैं – जो ये याद दिलाते हैं कि “यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है, यहां की एक भूल – जानलेवा हो सकती है।” इसके साथ ही जल्द ही वहां बड़े-बड़े होर्डिंग्स और साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे जिनमें यातायात नियमों से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें होंगी।
हादसों पर अंकुश लगाने के लिए सिर्फ चेतावनी ही नहीं, बल्कि कार्य योजना भी तैयार है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार MPRDC ने सोहागी घाटी के ‘ब्लैक स्पॉट्स’ की पहचान कर ली है और लगभग 24 करोड़ की लागत से सड़क की डिजाइन में व्यापक सुधार किए जाएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट्स की मदद से सड़क को और सुरक्षित बनाया जाएगा। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2019 से 2024 तक घाटी में 75 से ज्यादा जानलेवा हादसे हो चुके हैं जिनमें 72 से अधिक लोगों की मौत हुई। वहीं 2025 में अब तक लगभग 20 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। कई हादसे इतने भयानक थे कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और पहचान कर पाना भी मुश्किल हो गया।
हादसों की बढ़ती संख्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी आवाज उठाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि घाटी में सड़क निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी की गई, जिसके चलते मोड़ ज्यादा तीखे और खतरनाक बन गए। अब जबकि प्रशासन सजग हुआ है, तो उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह ‘मौत की घाटी’ बदल कर ‘सुरक्षित यात्रा मार्ग’ के रूप में जानी जाएगी। रीवा पुलिस का यह ‘डर आधारित जागरूकता अभियान’ अनूठा है और देश के अन्य दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्रों के लिए एक उदाहरण बन सकता है। क्योंकि जब समझाना न काम आए, तो दिखाना ज़रूरी हो जाता है – और यही संदेश देता है सोहागी घाटी में हवा में झूलता एक टूटा-फूटा वाहन। अगर आप भी वहां से गुजरें – तो ज़रा रफ्तार पर ब्रेक लगाएं, क्योंकि ये सिर्फ वाहन नहीं, मौत की यादें हैं।
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