
मुंबई के दहिसर इलाके में रहने वाले 45 वर्षीय प्रशांत प्रफुल नागवेकर को गरीबी ने इस कदर घेर लिया कि उन्होंने अपनी किडनी बेचने का मन बना लिया। लेकिन अपनी किस्मत संवारने की इस कोशिश में वे साइबर ठगों का शिकार हो गए और करीब 2.95 लाख रुपये गंवा बैठे।
प्रशांत पिछले 10 साल से अंधेरी पूर्व स्थित एक प्राइवेट कंपनी में ऑफिस बॉय की नौकरी कर रहे हैं और मात्र 15 हजार रुपये महीना कमाते हैं। इसमें से 10 हजार किराए में चला जाता है। परिवार में पत्नी, बेटा, मां और भाई हैं। आर्थिक हालात इतने खराब थे कि वे न तो लोन लेना चाहते थे और न ही किसी से मदद मांग सके। इसी दौरान उन्होंने गूगल पर किडनी बेचने का उपाय खोजा और एक फर्जी वेबसाइट के झांसे में आ गए।
दिल्ली के एक अस्पताल के नाम पर फर्जी विज्ञापन देने वालों ने उनसे किडनी के बदले एक करोड़ रुपये देने का झांसा दिया, लेकिन ऑपरेशन से पहले की जांच के नाम पर 2.95 लाख रुपये वसूले। यह रकम उन्होंने तीन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की, जिसके लिए ऑनलाइन लोन ऐप से कर्ज तक लेना पड़ा। जब और पैसे मांगे गए, तब प्रशांत को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने दहिसर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना न केवल साइबर क्राइम की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे आर्थिक तंगी और असहायता इंसान को खतरनाक फैसले लेने पर मजबूर कर सकती है।
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