
यूनिक समय, नई दिल्ली। दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई नीति को अब 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि चूंकि नई EV नीति का ड्राफ्ट तैयार होने और सार्वजनिक चर्चा में समय लगेगा, इसलिए मौजूदा नीति को ही आगे बढ़ाया गया है।
यह EV नीति सबसे पहले साल 2020 में आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा लागू की गई थी, जिसकी मियाद अगस्त 2023 में समाप्त हो गई थी। तब से यह अस्थायी रूप से आगे बढ़ती रही है। अब इसे औपचारिक रूप से मार्च 2026 तक या नई नीति के लागू होने तक प्रभावी रखा जाएगा।
पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने DPCC अधिकारियों के साथ एक बैठक कर एंड-ऑफ-लाइफ (EOL) गाड़ियों को लेकर इनोवेशन चैलेंज पर चर्चा की। इसके तहत पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
नई नीति के ड्राफ्ट पर सुझाव लेने के लिए सरकार आम नागरिकों, उद्योग विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और निजी संगठनों से बातचीत करेगी। इस दौरान चार प्रमुख बिंदुओं पर विशेष जोर रहेगा:
- EV चार्जिंग ढांचे को सुदृढ़ करना
- सब्सिडी और छूट की समीक्षा
- बैटरियों और ई-वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण के उपाय
- निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों की भूमिका को स्पष्ट करना
EV नीति का उद्देश्य है दिल्ली में अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन सुनिश्चित करना, खासतौर पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और व्यावसायिक गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में परिवर्तित करना। अगले वर्ष से पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर्स की संख्या सीमित करने की भी योजना है। वहीं, सीएनजी ऑटो रिक्शा को इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा।
सरकार ई-साइकिल, ई-रिक्शा, ई-कार्ट, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और छोटे कमर्शियल वाहनों के लिए सब्सिडी और अन्य लाभ प्रदान करेगी। साथ ही, चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स की संख्या भी बढ़ाई जाएगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने में सुविधा हो।
इस नीति का मुख्य मकसद दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करना है।
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