
यूनिक समय, नई दिल्ली। बिहार की सियासत में गर्मी तब और बढ़ गई जब जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पटना में मानसून सत्र के दौरान प्रशांत किशोर के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया, जिससे तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
प्रशांत किशोर ने बताया कि यह प्रदर्शन तीन प्रमुख मांगों को लेकर किया जा रहा है-
- सरकार द्वारा गरीब परिवारों को रोजगार के लिए घोषित ₹2 लाख की सहायता अब तक क्यों नहीं दी गई?
- दलित भूमिहीन परिवारों को वादा की गई 3 डिसमिल जमीन क्यों नहीं मिली?
- भूमि सर्वेक्षण में व्याप्त भ्रष्टाचार पर विधानसभा में चर्चा क्यों नहीं हो रही?
प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी, “जब तक सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधिमंडल आकर हमें ठोस आश्वासन नहीं देता, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। यह सिर्फ शुरुआत है, हम सरकार को चैन से बैठने नहीं देंगे।”
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह जल्द ही उनके घर का घेराव करेंगे। “हम उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने देंगे,” उन्होंने कहा। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि उन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिलने से रोका जा रहा है।
जनसुराज नेता ने यह भी बताया कि यह मार्च एक करोड़ लोगों से हस्ताक्षर एकत्र करने के बाद शुरू किया गया है, जो जनता की भावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों पर सरकार संज्ञान नहीं लेती।
बिहार में जनसुराज पार्टी का यह आक्रामक रुख आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरणों को बदल सकता है। प्रशांत किशोर का कहना है कि यह लड़ाई लंबी चलेगी और वह जनता की आवाज को दबने नहीं देंगे।
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