
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी रिलायंस ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज कर दी है। देशभर में अनिल अंबानी से जुड़ी 48 से 50 जगहों पर ED की छापेमारी चल रही है। यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दो प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए जाने के बाद की गई है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ग्रुप की कंपनियों ने बैंकों से हजारों करोड़ के लोन लेकर उनका दुरुपयोग किया। यह रकम घुमा-फिराकर दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित की गई और निवेशकों, आम लोगों और सरकारी संस्थाओं के साथ धोखाधड़ी की गई।
जांच एजेंसी को इस पूरे मामले में नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB), सेबी (SEBI), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी संस्थाओं से अहम सूचनाएं मिली हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच ग्रुप की कंपनियों ने यस बैंक से लगभग 3000 करोड़ रुपये का लोन लिया। आरोप है कि इस लोन को मंजूर कराने के लिए यस बैंक के अधिकारियों और प्रमोटर्स को रिश्वत दी गई और फिर यह रकम गलत तरीके से दूसरी कंपनियों में भेजी गई।
ED को यह भी पता चला है कि लोन देने की प्रक्रिया में बैंक ने अपने ही नियमों को नजरअंदाज किया। दस्तावेजों को बैकडेट में तैयार किया गया, बिना जरूरी क्रेडिट जांच और उचित दस्तावेजों के लोन पास किए गए। कई कंपनियों के डायरेक्टर्स और पते एक जैसे पाए गए, और कई बार लोन आवेदन और रकम की डिस्बर्समेंट एक ही दिन में हुई।
सेबी ने RHFL (Reliance Home Finance Ltd) से जुड़े एक मामले में जानकारी साझा की है, जिसमें केवल एक वर्ष में कंपनी का कॉरपोरेट लोन 3742 करोड़ से बढ़कर 8670 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस असामान्य वृद्धि को भी संदेह के घेरे में लिया गया है।
ED की यह व्यापक कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक धोखाधड़ी जैसे मामलों में एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है, जिसकी जांच अब कई एजेंसियों की निगरानी में हो रही है।
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