
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन यात्रा समाप्त करने के बाद आज मालदीव पहुंचे, जहां उनका स्वागत भव्य तरीके से किया गया। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू स्वयं एयरपोर्ट पहुंचे और उनके साथ विदेश, रक्षा, वित्त और गृह सुरक्षा मंत्रालयों के वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद रहे।
यह स्वागत न केवल भारत-मालदीव के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने वाला क्षण था, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़ा संकेत भी माना जा रहा है। जिस मुइज्जू ने चुनाव प्रचार के दौरान भारत विरोधी रुख अपनाया था और सत्ता में आते ही भारत की सैन्य उपस्थिति खत्म करने की कोशिश की थी, वही अब पीएम मोदी को लेकर गर्मजोशी से आगे बढ़ते दिखे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव भारत की सटीक कूटनीति और आर्थिक समर्थन की वजह से आया है। जब चीन ने मालदीव को कर्ज में डुबोना शुरू किया और माले की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी, तब मुइज्जू को भारत के महत्व का अहसास हुआ। भारत ने न केवल मालदीव को आर्थिक स्थिरता देने में मदद की, बल्कि हाल ही में एक आपदा के दौरान मानवीय सहायता भी भेजी।
पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकेत है। राष्ट्रपति मुइज्जू का यह स्वागत यह भी दर्शाता है कि अब वे भारत के साथ रिश्तों को प्राथमिकता देने के पक्षधर हैं। चीन और पाकिस्तान के लिए यह दृश्य किसी झटके से कम नहीं है, क्योंकि यह संकेत देता है कि मालदीव अब फिर से भारत के साथ खड़ा है।
यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करेगा।
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