
यूनिक समय, मथुरा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर के प्रशासनिक अधिकारों को लेकर जारी विवाद की सुनवाई के दौरान मंदिर की प्रबंधन समिति से पूछा कि देश में अब तक कितने मंदिरों का प्रशासन राज्य सरकारों ने अपने अधीन लिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से यह जानकारी जुटाने को कहा।
बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट की ओर से याचिका अधिवक्ता तन्वी दुबे द्वारा दायर की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश 2025 को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि मंदिर एक निजी धार्मिक संस्था है, जिसे सरकार अपने नियंत्रण में नहीं ले सकती। कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि अब तक जिन मंदिरों का अधिग्रहण हुआ है, वे सभी सार्वजनिक थे, जबकि बांके बिहारी मंदिर निजी ट्रस्ट द्वारा संचालित है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने पर भी सवाल किया। चूंकि इस विषय से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग पीठों में लंबित हैं, इसलिए अगली सुनवाई दो-तीन दिन में संभावित है।
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