
यूनिक समय, मथुरा। उत्तर प्रदेश विधानसभा ने बुधवार को बांके बिहारी मंदिर न्यास गठन संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी। अब यह न्यास मंदिर के चढ़ावे, दान, संपत्ति और प्रशासन से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां संभालेगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अनुसार न्यास को मंदिर में स्थापित मूर्तियों, परिसर और परसीमा में देवताओं के लिए दी गई भेंट, नकद या वस्तु रूपी अर्पण, डाक/तार से भेजे गए बैंक ड्राफ्ट, चेक, आभूषण, हुंडी संग्रह, अनुदान और योगदान सहित सभी चल-अचल संपत्तियों का स्वामित्व प्राप्त होगा।
सरकार के अनुसार, न्यास का गठन स्वामी हरिदास की परंपरा को आगे बढ़ाने और मंदिर के रीति-रिवाज, त्योहार और अनुष्ठानों को बिना हस्तक्षेप जारी रखने के उद्देश्य से किया गया है। न्यास दर्शन का समय तय करेगा। पुजारियों की नियुक्ति तथा वेतन-भत्ते निर्धारित करेगा। भक्तों व आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। साथ ही मंदिर प्रशासन, प्रसाद वितरण, वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांगों के लिए विशेष दर्शन मार्ग, पेयजल, विश्राम बेंच, कतार प्रबंधन, गौशालाएं, अन्नक्षेत्र, रसोई, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
न्यास में 11 मनोनीत और 7 पदेन सदस्य होंगे। मनोनीत सदस्यों में वैष्णव, सनातन और अन्य धर्म परंपराओं के प्रतिष्ठित संत, विद्वान, उद्यमी या समाजसेवी शामिल होंगे। साथ ही गोस्वामी परंपरा से स्वामी हरिदास जी के वंशज प्रतिनिधि होंगे। पदेन सदस्यों में मथुरा के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त, ब्रज तीर्थ विकास परिषद और मंदिर ट्रस्ट के सीईओ शामिल रहेंगे। सभी मनोनीत सदस्य सनातनी हिंदू होंगे और कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। यदि कोई पदेन सदस्य गैर-हिंदू हुआ तो उसकी जगह कनिष्ठ अधिकारी को नामित किया जाएगा।
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