
यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% अमेरिकी टैरिफ आज यानी बुधवार, 27 अगस्त से प्रभावी हो गया है। इस कदम का सीधा असर भारत के उन श्रम आधारित और कम मुनाफे वाले उद्योगों पर पड़ने का अनुमान है, जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं।
किन क्षेत्रों पर होगा सबसे ज्यादा असर?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के एक अनुमान के मुताबिक, इस 50% अमेरिकी टैरिफ के कारण 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात 43% तक गिर सकता है, जिससे यह 87 अरब डॉलर से घटकर 49।6 अरब डॉलर पर आ जाएगा। कुल निर्यात मूल्य का करीब दो-तिहाई हिस्सा अब इस नए 50% शुल्क के दायरे में आएगा।
कपड़ा उद्योग: भारत द्वारा निर्यात किए गए कपड़ों पर लगने वाला कुल टैरिफ 9% से बढ़कर 59% हो जाएगा। वहीं, रेडीमेड कपड़ों पर यह बढ़कर 13.9% से 63.9% हो जाएगा।
फर्नीचर और मैट्रेस: पहले भारत द्वारा निर्यात किए गए फर्नीचर और मैट्रेस पर 2.3% का शुल्क लगता था, जो अब बढ़कर 52.3% हो जाएगा। इस क्षेत्र में 48 लाख लोग काम करते हैं।
स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर: इन पर टैरिफ 1.7% से बढ़कर 51.7% हो जाएगा। इस सेक्टर से 55 लाख से अधिक लोग जुड़े हैं। नए टैरिफ के लागू होने से इसका सीधा असर इन उद्योगों से जुड़े व्यापारियों और कामगारों पर पड़ सकता है।
झींगा: पहले भारत द्वारा निर्यात किए गए झींगा पर कोई टैरिफ नहीं था, लेकिन अब इस पर सीधा 50% शुल्क लगेगा।
मशीनरी और मैकेनिकल एप्लायंस: इन पर पहले 1.3% टैरिफ लगाया जाता था, लेकिन अब यह बढ़कर 51.3% हो जाएगा।
यह नया टैरिफ अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों का हिस्सा है। हालांकि, भारत सरकार ने इस कदम को अन्यायपूर्ण बताया है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की बात कही है।
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