
यूनिक समय, मथुरा। यमुना नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण मथुरा जिले में हालात बेकाबू हो गए हैं। रविवार को यमुना का जलस्तर खतरे के निशान (166 मीटर) से 1.55 मीटर ऊपर, 167.55 मीटर पर दर्ज किया गया, जिसके बाद केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने मथुरा में रेड अलर्ट घोषित कर दिया है। पिछले एक सप्ताह से जारी इस बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, और मथुरा-वृंदावन की कई कॉलोनियां और जिले के 45 गांव जलमग्न हो गए हैं।
प्रमुख क्षेत्रों में बाढ़ से गंभीर स्थिति
लक्ष्मीनगर: इस क्षेत्र के तिवारीपुरम और ईशापुर समेत दर्जन भर कॉलोनियों में पानी इतना भर गया है कि एक-एक मंजिल तक डूब गई हैं। लोगों को अचानक घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मथुरा-वृंदावन: सदर बाजार, जयसिंहपुरा और वृंदावन की कई बस्तियां और कॉलोनियां पानी में समा गई हैं। यमुना विश्राम घाट के आसपास के मार्ग बंद कर दिए गए हैं, और यहाँ की दुकानें पूरे दिन बंद रहीं, जिससे व्यापार पर भी असर पड़ा है।
नौहझील: जिले के 45 गांव में से नौहझील, सौंख क्षेत्र, मांट और शेरगढ़ के गांव टापू बन गए हैं। नौहझील क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहाँ अतिसंवेदनशील 9 गांवों में लगभग 200 मकान डूब गए हैं। घरों में 5-6 फीट और गांवों में 3-4 फीट तक पानी बह रहा है। लाखों का सामान खराब हो गया है और एक दर्जन से अधिक मकानों की दीवारें ढह गई हैं।
राहत और बचाव कार्य
प्रशासन ने अब तक बाढ़ प्रभावित 45 गांवों और कॉलोनियों से नौ हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुँचाया है। रविवार को डीएम चंद्रप्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने ट्रैक्टर पर बैठकर लक्ष्मीनगर के तिवारीपुरम का दौरा किया, जहाँ उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
डीएम ने राहत शिविरों का भी निरीक्षण किया और साफ-सफाई, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों के लिए विशेष इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एडीएम डॉ. पंकज कुमार वर्मा ने बताया कि राहत सामग्री लगातार पहुँचाई जा रही है। एसडीएम मांट रितु सिरोही और तहसीलदार बृजेश कुमार ने भी नौहझील के बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर ग्रामीणों और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की।
आगे का पूर्वानुमान और अन्य प्रभाव
सिंचाई विभाग के अपर खंड के एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया कि रविवार शाम 5 बजे हथिनीकुंड से 44,016 क्यूसेक और ओखला से 1.6 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि गोकुल बैराज से 1.56 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हथिनीकुंड से पानी की कम मात्रा छोड़े जाने के कारण सोमवार के बाद जलस्तर में कमी आएगी।
बाढ़ के कारण मांट-पानीगांव मार्ग पर लगभग चार फीट पानी बह रहा है, जिससे प्रशासन ने वाहनों का आवागमन बंद कर दिया है। इसके अलावा, राधारानी मानसरोवर में भी जलस्तर बढ़ने से मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, केवल सेवायतों को ही पूजा की अनुमति है। लखनऊ स्थित केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने भी जिलाधिकारी को सतर्क रहने का पत्र जारी किया है।
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