
यूनिक समय, वृंदावन। मकानों के चारों ओर पानी ही पानी। छतों पर लोगों का ठिकाना। रात के सन्नाटे में यमुना की कल-कल करती पानी की धारा के बीच अंधकार । हर रोज दिन निकलने पर नई उम्मीदों की आस। छोटे बच्चे दूध से बिलखते हुए। मां इस इंतजार में कोई मददगार दूध देने आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
यह हालात हैं उफनती यमुना के पानी से घिरे मकानों में रहने वाले परिवारों के। ऐसे परिवार एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में है। घरों के अंदर कई-कई फुट पानी भरा है। पानी में सामान डूबा है। घरों की छतों पर परिवार के लोगों ने डेरा डाल रखा है।
अधिकारियों की टीम अधिकांश इन घरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। यदि राहत सामग्री को लेकर आने वाली नाव या स्टीमर इन लोगों को दिखाई पड़ जाए तो चेहरे पर कुछ तनाव कम होता है, चलो खाने के लिए कुछ सामान आ रहा है। वह लोग जान हथेली पर रखकर घरों से बाहर निकलते हैं राहत सामग्री को लेकर चले जाते हैं। ऐसे कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं, जो मददगार दे जाते हैं, वह बाढ़ पीड़ित खा लेते हैं।
कई पीड़ितों ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चों के लिए गाय और भैंस का दूध नहीं मिल रहा है। दूध न मिलने के कारण बच्चे बिलखते रहते हैं। मानवता के नाते मददगार कुछ ऐसे इलाकों तक पहुंच पा रहे हैं। वह राहत सामग्री लेकर आते हैं।
नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
ये भी पढ़ें: Mathura News: मथुरा के महिला अस्पताल में लगी आग, मरीजों में हड़कंप
Leave a Reply