
यूनिक समय, मथुरा। जहां पूरे देश में विजयदशमी के अवसर पर रावण दहन की धूम रहती है, वहीं मथुरा में इसका एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। जमुना पुल के नीचे बने महाराज दशानंद रावण मंदिर में एडवोकेट ओमवीर सिंह सारस्वत ने रावण दहन के विरोध में भजन-कीर्तन और अखंड पूजा का आयोजन किया।
26 वर्षों से रावण दहन का विरोध
ओमवीर सारस्वत पिछले 26 वर्षों से रावण दहन का लगातार विरोध करते आ रहे हैं। उनका तर्क है कि रावण केवल एक खलनायक नहीं थे, बल्कि वह विद्वान ब्राह्मण और वेदों के ज्ञाता भी थे।
ओमवीर सारस्वत ने याद दिलाया कि भगवान राम ने भी अपने छोटे भाई लक्ष्मण को शिक्षा ग्रहण करने के लिए रावण के पास भेजा था। इसके अलावा, रावण भगवान शिव के अनन्य भक्त थे।
‘पुतला जलाना उचित नहीं, परंपरा खत्म हो’
ओमवीर सारस्वत ने माना कि भगवान राम और रावण के बीच युद्ध हुआ और बुराई पर अच्छाई की जीत हुई, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बार-बार हर वर्ष रावण का पुतला जलाना उचित नहीं है। उनका मानना है कि यह परंपरा अब खत्म होनी चाहिए क्योंकि इससे गलत संदेश जाता है।
उन्होंने जनता और सरकार से अपील की कि रावण दहन की प्रथा को बंद किया जाए। उनका कहना है कि अच्छाई की जीत का संदेश देने के और भी तरीके हैं, लेकिन बार-बार किसी विद्वान और शिवभक्त का अपमान करना सही नहीं है। इस मौके पर पूजा-अर्चना में कई लोग शामिल हुए, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।
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