
यूनिक समय, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप के कारण बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। बीते 24 घंटों में तीन और मासूमों ने दम तोड़ दिया, जिससे मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। मरने वालों में छिंदवाड़ा के 17, पांढुर्ना का 1 और बैतूल के 2 बच्चे शामिल हैं।
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले में बेहद सख्त है और आरोपी कंपनी पर कार्रवाई की जा रही है। ‘कोल्ड्रिफ सिरप’ बनाने वाली कंपनी के मालिक को गिरफ्तार करने के लिए छिंदवाड़ा पुलिस की दो टीमें चेन्नई और काछीपुरम पहुँच चुकी हैं।
मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि वह नागपुर के अस्पतालों में भर्ती पाँच बच्चों से मिलकर आए हैं, जो अब भी जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) से हड़ताल पर न जाने और ICMRC की उस एडवायजरी का पालन करने का अनुरोध किया, जिसमें चार साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न देने की सलाह दी गई है।
मौत और जांच का विवरण
नागपुर के अस्पतालों में इलाज के दौरान तामिया की धानी डेहरिया (डेढ़ वर्ष), जुन्नारदेव के ज्यांशु यदुवंशी (2 वर्ष) और रीधोरा के वेदांश पवार (ढाई वर्ष) ने दम तोड़ा। इन मौतों के साथ, छिंदवाड़ा जिले में कुल मरने वाले बच्चों की संख्या 17 हो गई है। पांढुर्ना में एक की मौत हो चुकी है। बैतूल में भी दो बच्चों की मौत हो गई है। पाँच बच्चे अभी भी नागपुर के अस्पतालों में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि कुछ निजी चिकित्सकों, जिनमें डॉ. प्रवीण सोनी प्रमुख हैं, ने बच्चों को ‘कोल्ड्रिफ सिरप’ दी थी। मेडिकल जांच में पुष्टि हुई है कि सिरप में जहरीले रासायनिक तत्वों की मौजूदगी थी, जिसने बच्चों के शरीर में पहुँचकर किडनी को प्रभावित किया, जिससे किडनी फेल होने के कारण कई बच्चों की मौत हो गई।
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