
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मुंबई में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ‘विजन 2035 रोडमैप’ के तहत भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर गहन चर्चा की।
पीएम मोदी और स्टार्मर के बीच बातचीत में मुख्य रूप से व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, जलवायु और शिक्षा में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों नेता ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 और सीईओ फोरम में भी भाग लेंगे।
वैश्विक अस्थिरता के बीच साझेदारी की उम्मीदें
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता का माहौल है। इस पृष्ठभूमि में भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत साझेदारी की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद अपनी पहली भारत यात्रा पर आए स्टार्मर ने बुधवार को कहा था कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत मिलने वाले अवसर अद्वितीय हैं।
उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने वाले भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक ‘लॉन्चपैड’ है। स्टार्मर अपने साथ ब्रिटेन के शीर्ष व्यापार जगत के नेताओं, उद्यमियों और विश्वविद्यालय के कुलपतियों सहित 125 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल लेकर भारत आए हैं।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा, “हमने जुलाई में भारत के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता किया, जो किसी भी देश द्वारा किया गया अब तक का सबसे अच्छा समझौता है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।” उन्होंने कहा, “यह सिर्फ़ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं है, यह विकास का एक लॉन्चपैड है। भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है और इसके साथ व्यापार तेज़ और सस्ता होने वाला है, इसलिए जो अवसर पैदा होंगे वे बेजोड़ हैं।” स्टार्मर ने कहा कि भारत में विकास का मतलब देश में ब्रिटिश लोगों के लिए ज़्यादा विकल्प, स्थिरता और रोज़गार है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से ढाई महीने पहले, दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
प्रौद्योगिकी और भविष्य के संबंध
ब्रिटिश विज्ञप्ति के अनुसार, ‘विजन 2035 रोडमैप’ पर मोदी और स्टार्मर की वार्ता से ब्रिटेन-भारत संबंध और मजबूत होंगे। दोनों नेता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), दूरसंचार और रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य रखेंगे, जिससे निवेश और विकास के नए अवसर पैदा होंगे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत तेजी से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी खिलाड़ियों में से एक बन रहा है और 2030 तक इस क्षेत्र का मूल्य एक लाख करोड़ पाउंड होने की उम्मीद है।
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