
यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हजारों परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक चयन वेतनमान पाने के लिए भटकने को मजबूर हैं। नियुक्ति के दस वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी यह लाभ न मिलने से शिक्षकों में गहरी नाराजगी है।
शिक्षकों की समस्या और विरोध
विशेष रूप से 29 हजार विज्ञान-गणित शिक्षक प्रभावित हैं, जिनकी सीधी भर्ती सितंबर 2015 में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हुई थी। सेवा अवधि के 10 वर्ष पूरे होने के बावजूद, चयन वेतनमान की प्रक्रिया शुरू न होने से वे निराश हैं।
परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने शिकायत की है कि अधिकारी मानव संपदा पोर्टल पर तकनीकी समस्या का हवाला देकर चयन वेतनमान लगाने में हीलाहवाली (टालमटोल) कर रहे हैं। कई जिलों के शिक्षकों ने इस संबंध में प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
2015 में, राज्य भर के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 29,000 विज्ञान और गणित शिक्षकों की सीधी भर्ती की गई थी। ये शिक्षक अब दस साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, लेकिन चयन वेतनमान न मिलने से उनका असंतोष बढ़ता जा रहा है। विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने शिकायत की है कि अधिकारी मानव संसाधन पोर्टल में तकनीकी समस्याओं का हवाला देकर चयन वेतनमान लागू करने में देरी कर रहे हैं।
कई शिक्षकों की ई-सर्विस बुक अब तक अपडेट नहीं हुई है। इसमें कैडर, सातवें वेतन आयोग (2016) के अनुपालन सहित कई त्रुटियां हैं, जिनके सुधार के लिए शिक्षक लगातार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। कुछ स्थानों पर शिक्षकों ने ऑफलाइन आवेदन भी जमा किए हैं, लेकिन उन पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
प्राथमिक शिक्षक संघ का सुझाव
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने बेसिक शिक्षा विभाग को सुझाव दिया है कि यदि ऑनलाइन प्रक्रिया में लगातार तकनीकी बाधा आ रही है, तो शिक्षकों को ऑफलाइन माध्यम से तुरंत चयन वेतनमान का लाभ दिया जाना चाहिए।
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