
यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत में हर साल सड़क हादसों में मरने वालों में लगभग 36% लोग पैदल यात्री होते हैं। इस गंभीर समस्या के बीच, अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश में पैदल यात्रियों के चलने की दिशा गलत है। जबलपुर निवासी ज्ञान प्रकाश ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि भारत में पैदल यात्रियों को सड़क की “दाईं ओर” चलना चाहिए।
याचिकाकर्ता का तर्क और कारण
ज्ञान प्रकाश का कहना है कि वर्तमान में सिखाया जाने वाला बाईं ओर चलने का नियम मुख्य रूप से वाहन चालकों के लिए है। जब पैदल यात्री सड़क की बाईं ओर चलते हैं, तो वाहन उनके पीछे से आते हैं, जिससे वे उन्हें देख नहीं पाते और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका, फ्रांस, रूस, जर्मनी और चीन जैसे देशों में पैदल यात्री सड़क की दाईं ओर चलते हैं, यानी सामने से आती गाड़ियों की दिशा में। इससे वे न केवल वाहन को देख पाते हैं, बल्कि किसी आपात स्थिति में खुद को बचाने का मौका भी मिलता है।
सड़क परिवहन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, टू-व्हीलर के बाद सबसे ज्यादा मौतें पैदल यात्रियों की होती हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि जबलपुर शहर सड़क हादसों में पैदल यात्रियों की मौत के मामलों में राज्य में सबसे आगे है।
40 साल पुराना अभियान
याचिकाकर्ता ज्ञान प्रकाश पिछले 40 सालों से इस विषय पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उन्होंने 1984 में “यातायात शिक्षा” नाम की एक किताब भी लिखी थी, जिसमें उन्होंने पैदल यात्रियों को सामने से आने वाले ट्रैफिक की ओर चलने की सलाह दी थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि सरकार पैदल चलने वालों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और एक हाईवे सेफ्टी कोड तैयार करे ताकि सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर संज्ञान लिया है और केंद्र सरकार तथा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से जवाब मांगा है कि क्या भारत में भी विदेशों की तरह पैदल यात्रियों को सड़क की दाईं ओर चलने का नियम बनाया जा सकता है।
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