
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा अमेरिका में किए गए एक बड़े अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि टेक्नोलॉजी बच्चों के जीवन का एक अपरिहार्य हिस्सा बन चुकी है, लेकिन माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम को प्रबंधित करने में चुनौती महसूस कर रहे हैं। यह डिजिटल दौड़ अब स्मार्टफोन, टैबलेट, यूट्यूब से लेकर AI और चैटबॉट्स तक पहुँच चुकी है।
टेक्नोलॉजी का शुरुआती एक्सपोजर
12 साल या उससे छोटे बच्चों के 90% अमेरिकी पैरेंट्स ने स्वीकार किया कि उनका बच्चा कभी न कभी टीवी देखता है। 68% बच्चे टैबलेट, 61% स्मार्टफोन और 50% बच्चे गेमिंग डिवाइस इस्तेमाल करते हैं। 82% पैरेंट्स ने कहा कि उनका 2 साल से छोटा बच्चा भी टीवी देखता है। 40% मानते हैं कि इस उम्र में उनका बच्चा मोबाइल पर बात करता है।
लगभग 40% पैरेंट्स ने बताया कि उनका बच्चा सिरी या एलेक्सा जैसे वॉयस असिस्टेंट का उपयोग करता है, जबकि 10% बच्चे चैटजीपीटी या जेमिनी जैसे चैटबॉट्स से बातें कर रहे हैं। 85% बच्चे अक्सर यूट्यूब देखते हैं, जिनमें से आधे तो रोजाना इस प्लेटफॉर्म पर वीडियो देखते हैं। 2020 में 2 साल से कम उम्र के यूट्यूब देखने वाले बच्चे 45% थे, जो बढ़कर 62% हो गए हैं।
स्मार्टफोन स्वामित्व और चिंताएँ
हर चार में से एक पैरेंट ने कहा कि उनके बच्चे के पास खुद का स्मार्टफोन है। 11-12 साल के 60% बच्चों के पास खुद का फोन है। 8-10 साल के बच्चों में यह आँकड़ा 29% है।
निम्न आय वर्ग के 31% बच्चों के पास अपना फोन है, जो मध्यम (20%) और उच्च आय वर्ग (16%) से अधिक है। 68% पैरेंट्स मानते हैं कि बच्चों को स्मार्टफोन 12 साल का होने पर ही मिलना चाहिए।
ज्यादातर पैरेंट्स ने संपर्क में रहने, मनोरंजन और लर्निंग के लिए फोन दिया है, जबकि कुछ ने बच्चे को व्यस्त रखने या उसे अकेला महसूस न होने देने के लिए भी फोन देना स्वीकारा।
सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम प्रबंधन
80% अमेरिकी पैरेंट्स मानते हैं कि सोशल मीडिया के नुकसान ज्यादा हैं। 11-12 साल के 37% बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद हैं (कुल 15% बच्चों की सोशल मीडिया पर मौजूदगी है)। 87% पैरेंट्स के लिए स्क्रीन टाइम मैनेज करना प्राथमिकता है, हालाँकि 42% ने माना कि वे इसे बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
67% ने कहा कि टेक कंपनियों को बच्चों के लिए ऑनलाइन कंटेंट पर सख्त नियम बनाने चाहिए, और 55% ने सरकार के दखल की मांग की। 84% पैरेंट्स शिष्टाचार, पर्याप्त नींद और सक्रियता को स्क्रीन टाइम से ज्यादा महत्व देते हैं।
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