Breaking News: बॉलीवुड की ‘स्वर्णिम युग’ की दिग्गज अभिनेत्री कामिनी कौशल का 98 वर्ष की आयु में निधन

'स्वर्णिम युग' की दिग्गज अभिनेत्री कामिनी कौशल

यूनिक समय, नई दिल्ली। बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री कामिनी कौशल का 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे उम्रदराज अभिनेत्रियों में से एक माना जाता था। उनके निधन से फिल्म जगत में एक बड़ा खालीपन आ गया है। कामिनी कौशल ने अपने लंबे करियर में दिलीप कुमार, धर्मेंद्र, राज कपूर और देव आनंद जैसे दिग्गजों के साथ काम किया था। उनके निधन की खबर की पुष्टि करते हुए, उनके परिवार ने प्राइवेसी बनाए रखने का अनुरोध किया है।

कामिनी कौशल का मौत का कारण उम्र संबंधी समस्याओं को बताया जा रहा है। अभिनेत्री का जन्म 24 फरवरी 1927 को लाहौर में उमा कश्यप के रूप में हुआ था। उनके पिता, प्रोफेसर शिव राम कश्यप, भारतीय वनस्पति विज्ञान के जनक कहे जाते थे।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत चेतन आनंद की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई फिल्म ‘नीचा नगर’ (1946) से की थी। यह फिल्म पहली भारतीय फिल्म थी जिसने कान फिल्म समारोह में प्रतिष्ठित पाल्मे डोर (गोल्डन पाम) पुरस्कार जीता था, जिसने उन्हें विश्वव्यापी पहचान दिलाई।

1946 से 1963 तक, वह मुख्य नायिका के रूप में सक्रिय रहीं और ‘दो भाई’, ‘नदिया के पार’ और ‘जिद्दी’ जैसी क्लासिक फिल्मों में अपनी सहज और प्राकृतिक अभिनय शैली के लिए दर्शकों की पसंदीदा बनी रहीं। उन्हें ‘बिराज बहू’ (1956) में उत्कृष्ट अभिनय के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार से नवाजा गया था।

व्यक्तिगत जीवन और बाद की फिल्में

कामिनी कौशल की शादी बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट में मुख्य अभियंता रहे ब्रह्म एस सूद से हुई थी, जो उनके जीजा थे। एक कार एक्सीडेंट में बहन की मौत के बाद, उनकी शादी कामिनी से कराई गई थी, जिसके बाद उन्होंने फिल्मों से कुछ दूरी बना ली थी।

उनके और अभिनेता दिलीप कुमार के बीच अफेयर की खबरें भी काफी चर्चा में रही थीं, जिन्होंने कई फिल्मों में साथ काम किया था। उन्होंने बाद में चरित्र भूमिकाओं से अभिनय में वापसी की और नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी लोकप्रिय हुईं। उन्हें शाहरुख खान की ‘चेन्नई एक्सप्रेस’, शाहिद कपूर की ‘कबीर सिंह’ में दादी की भूमिका में और आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ में कैमियो भूमिका में देखा गया था। कामिनी कौशल अपनी कला, सादगी और हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में दिए गए योगदान के कारण भारतीय सिनेमा में एक प्रेरणा बनकर हमेशा याद की जाएंगी।

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