
यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार पैकेज को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है, जिसके तहत भारत को अत्याधुनिक जैवेलिन एंटी-टैंक मिसाइलें और एक्सकैलिबर प्रिसिजन आर्टिलरी राउंड मिलेंगे। अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने इस प्रस्तावित बिक्री की औपचारिक जानकारी अमेरिकी कांग्रेस को भेज दी है, जो किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय हथियार सौदे का अनिवार्य हिस्सा होती है।
सौदे में शामिल मुख्य हथियार
इस महत्वपूर्ण सौदे में 100 एफजीएम-148 ‘जैवेलिन’ एंटी-टैंक मिसाइलें, 25 हल्के कमांड लॉन्च यूनिट (CLUs), 216 ‘एक्सकैलिबर’ प्रिसिजन आर्टिलरी राउंड रक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं, जिनके संचालन, रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण और सैनिकों के प्रशिक्षण से जुड़े सभी सपोर्ट पैकेज भी दिए जाएंगे।
अमेरिका ने बताया रणनीतिक साझेदारी को मजबूती
डीएससीए ने स्पष्ट किया है कि यह सौदा अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। अमेरिका का कहना है कि यह भारत की क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे वह वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सके, अपनी सीमाओं की रक्षा को मजबूत कर सके और क्षेत्रीय खतरों को प्रभावी ढंग से रोक सके।
एजेंसी ने यह भी आश्वस्त किया है कि भारत को इन आधुनिक हथियारों को अपनी सेना में शामिल करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
अमेरिका ने यह भी साफ किया कि यह हथियार बिक्री दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन को नहीं बदलती। यह भी साफ़ किया कि इस डील में अभी कोई ऑफ़सेट अरेंजमेंट नहीं है; अगर कोई है, तो इस पर इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के बीच अलग से बातचीत होगी।
जैवेलिन मिसाइल और एक्सकैलिबर राउंड की खासियत
1. जैवेलिन मिसाइलें (FGM-148):
- इसे दुनिया की सबसे उन्नत कंधे से दागी जाने वाली एंटी-टैंक मिसाइल माना जाता है।
- इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ‘टॉप-अटैक मोड’ है, जिसके तहत मिसाइल ऊपर से हमला करती है, जहां टैंक का कवच सबसे कमजोर होता है।
- सॉफ्ट लॉन्च सिस्टम के कारण इसे इमारतों या बंकर जैसे बंद स्थानों से भी सुरक्षित रूप से दागा जा सकता है।
- यूक्रेन युद्ध में रूसी टी-72 और टी-90 टैंकों को नष्ट करने में इसकी प्रभावी भूमिका चर्चा में रही है।
2. एक्सकैलिबर आर्टिलरी राउंड:
- ये राउंड जीपीएस-गाइडेड होते हैं, जिसके कारण तोपों से दागे जाने पर ये अपने लक्ष्य पर बेहद सटीक प्रहार करते हैं।
- इसकी सटीकता से अनावश्यक क्षति कम होती है, और भारत पहले भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर चुका है।
- यह सौदा अब अमेरिकी कांग्रेस के पास अंतिम समीक्षा के लिए है, जिसके बाद हथियारों की डिलीवरी शुरू हो सकेगी।
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