
यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में नियोजन विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सभी विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि अब आधार कार्ड को जन्म तिथि प्रमाण पत्र (Date of Birth Proof) के रूप में मान्य नहीं माना जाएगा। विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
उत्तर प्रदेश में आधार की मान्यता समाप्त
नियोजन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड में जन्मतिथि का कोई प्रमाण पत्र अटैच नहीं होता, इसलिए इसे डेट ऑफ बर्थ के प्रमाण पत्र के तौर पर नहीं माना जाएगा। यह निर्देश उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी विभागों पर लागू होगा, जहां विभिन्न योजनाओं और नियुक्तियों में जन्मतिथि प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।
UIDAI का राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान
यह कदम ऐसे समय आया है जब केंद्र स्तर पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार डेटाबेस की सटीकता बनाए रखने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, UIDAI ने राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान के तहत 2 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार कार्ड नंबरों को डिएक्टिवेट कर दिया है।
यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि मृत आधार धारक की पहचान का इस्तेमाल किसी भी फ्रॉड गतिविधि या अनाधिकृत तरीके से न हो सके। UIDAI यह भी सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को पहले असाइन किया गया आधार नंबर दूसरे व्यक्ति को रि-असाइन नहीं किया जाता है।
मृत आधार धारकों के लिए नई सुविधा
UIDAI ने इस वर्ष की शुरुआत में एक नई सुविधा भी लॉन्च की है, जिसके तहत परिवार के सदस्य मृत आधार कार्ड धारक की सूचना दे सकते हैं परिवार के सदस्य ‘मायआधार’ (myAadhaar) पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्हें खुद को प्रमाणित करने के बाद, पोर्टल पर आधार नंबर, डेथ रजिस्ट्रेशन नंबर और मृत व्यक्ति की डेमोग्राफिक डिटेल्स सबमिट करनी होगी।
यह सुविधा वर्तमान में सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम का इस्तेमाल करने वाले 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुकी है। शेष राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इंटीग्रेशन की प्रक्रिया पर काम चल रहा है।
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