
मथुरा। बरसाना धाम में शनिवार सुबह उस समय अनोखी हलचल देखी गई जब अचानक संत प्रेमानंद जी महाराज के पहुंचने की खबर फैल गई। कुछ ही देर में गांव की गलियां श्रद्धा और उत्साह से भर उठीं। कहीं लोग परिक्रमा मार्ग की ओर भागते दिखे तो कहीं भक्त सीधे श्रीजी मंदिर की ओर दौड़ पड़े। धाम में मानो स्वतः ही आस्था का सैलाब उमड़ आया।
संत प्रेमानंद महाराज बिना किसी पूर्व सूचना, स्वागत या विशेष व्यवस्था के सीधे श्रीजी मंदिर पहुंचे। पुरानी सीढ़ियों से साधारण भक्त की तरह शांति और स्थिरता के साथ ऊपर चढ़ते हुए उन्होंने सभी को सरलता और संन्यास की अनोखी मिसाल दिखाई। मंदिर परिसर में पहुंचकर वे कतार में खड़े हुए और गर्भगृह में राधारानी के सम्मुख कुछ क्षणों तक मौन ध्यान में रहे। उस पल मंदिर का वातावरण इतना शांत हो गया कि उपस्थित हर व्यक्ति ने उस अनुभूति को अपने भीतर उतरते हुए महसूस किया।
दर्शन के बाद संत जी ने कहा— “यहां हवाएं नहीं चलतीं, यहां राधा नाम की अनुभूति बहती है।” उनकी यह पंक्ति सुनते ही कई भक्त भावुक हो उठे। स्थानीय संतों ने इसे बिना आडंबर वाली सच्ची भक्ति का दुर्लभ दर्शन बताया, जहां एक बड़े संत ने अनुयायियों की भीड़ से दूर सहज भाव से धाम के दर्शन किए। दिनभर बरसाना में इसी चर्चा का माहौल रहा कि जिस दिव्य भाव को पाने के लिए लोग आश्रमों और प्रवचनों तक जाते हैं, आज वही भाव स्वयं सीढ़ियों से होकर धाम में उतर आया। संत प्रेमानंद महाराज के इस अनपेक्षित आगमन ने बरसाना वासियों के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक क्षण रच दिया।
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