IndiGo Crisis: DGCA ने सीईओ पीटर एल्बर्स को किया तलब, मांगा हालिया परिचालन बाधाओं से जुड़ा व्यापक डेटा

DGCA ने सीईओ पीटर एल्बर्स को किया तलब

यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर परिचालन संकट से जूझ रही है। स्थिति सामान्य होने के सीईओ के दावों के बावजूद, उड़ानें रद्द होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इस बीच, नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ा रुख अपनाते हुए इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को गुरुवार को दोपहर 3 बजे सभी हालिया परिचालन बाधाओं से जुड़ा व्यापक डेटा और अपडेट पेश करने का निर्देश दिया है।

DGCA ने सीईओ को किया तलब, मांगा पूरा विवरण

DGCA ने इंडिगो के सीईओ को सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में उपस्थित रहने का स्पष्ट निर्देश दिया है। नियामक के आदेश के अनुसार, एयरलाइन को फ्लाइट्स फिर से शुरू करने, पायलट और क्रू के रिक्रूटमेंट प्लान, पायलट और केबिन क्रू की संख्या, कैंसिल हुई फ्लाइट्स की संख्या और अब तक दिए गए रिफंड वगैरह के बारे में जानकारी देने को कहा गया है।ड आदि के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

संकट 9वें दिन भी जारी

इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने 9 दिसंबर को दावा किया था कि एयरलाइन की स्थिति अब सामान्य हो गई है, लेकिन यह दावा ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा है। संकट के 9वें दिन बुधवार को भी अकेले बंगलूरू एयरपोर्ट से 61 उड़ानें (35 आगमन और 26 प्रस्थान) रद्द कर दी गईं।

रोजाना लगभग 2300 फ्लाइट्स संचालित करने वाली और घरेलू मार्केट में 60% से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली इस एयरलाइन का मार्केट कैप मौजूदा संकट के बाद करीब 21,000 करोड़ रुपये तक घट चुका है।

संकट का मूल कारण और सरकारी कार्रवाई

इंडिगो के इस संकट का मुख्य कारण यह है कि एयरलाइन नए सुरक्षा नियमों के अनुसार अपने संचालन की योजना समय पर नहीं बना पाई, जिससे 1 दिसंबर से हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इसके कारण टिकटों के दाम बढ़े, एयरपोर्ट पर भीड़ हुई और यात्रियों का आरोप है कि उड़ानें बिना बताए अत्यधिक देरी से चलाई गईं या रिशेड्यूल की गईं।

लगातार गड़बड़ी के बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई की है, जिसमें पहले सीईओ और सीओओ को शो-कॉज नोटिस भेजा गया। इसके बाद टिकट के किराए पर कैप लगाया गया। सबसे बड़ी कार्रवाई मंगलवार को हुई, जब सरकार ने इंडिगो के विंटर फ्लाइट शेड्यूल में 10% कटौती का आदेश दिया, जिससे रोज लगभग 220 उड़ानें कम होंगी। नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने कहा कि यह कदम परिचालन को स्थिर करने और रद्दीकरण कम करने के लिए आवश्यक था।

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