BlueBird Block-2: इसरो ने रचा इतिहास; अंतरिक्ष में स्थापित किया दुनिया का सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट

इसरो ने रचा इतिहास

यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने साल 2025 का समापन एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ किया है। अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 के जरिए इसरो ने अमेरिकी कंपनी ‘एएसटी स्पेसमोबाइल’ के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (BlueBird Block-2) उपग्रह को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया है। यह न केवल इसरो की व्यावसायिक कुशलता का प्रमाण है, बल्कि भविष्य की टेलीकॉम क्रांति का आधार भी है।

मिशन की बड़ी बातें

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे हुई इस लॉन्चिंग ने विज्ञान जगत को चौंका दिया है। लगभग 6,500 किलोग्राम वजन वाला यह सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित होने वाला अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह है। इस उपग्रह की सबसे बड़ी क्रांति यह है कि इसके सफल होने के बाद स्मार्टफोन को नेटवर्क के लिए मोबाइल टावरों की जरूरत नहीं होगी। यह सीधे अंतरिक्ष से 4G और 5G ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

पहाड़ों, रेगिस्तानों और महासागरों जैसे उन इलाकों में भी मोबाइल सिग्नल पहुंच सकेंगे, जहाँ टावर लगाना असंभव है। साथ ही, आपदा के समय जब जमीन पर मोबाइल इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट हो जाता है, तब यह सैटेलाइट नेटवर्क संजीवनी का काम करेगा।

पीएम मोदी दी बधाई

इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गदगद होते हुए इसरो और देश के वैज्ञानिकों को बधाई दी। पीएम ने एक्स (ट्वीट) पर लिखा कि “भारत के युवाओं की ताकत से, हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम ज्यादा आधुनिक और असरदार बन रहा है। LVM3 ने भरोसेमंद हैवी-लिफ्ट प्रदर्शन दिखाया है, जिससे हम गगनयान जैसे भविष्य के मिशन के लिए नींव मजबूत कर रहे हैं, कमर्शियल लॉन्च सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं और वैश्विक साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। यह बढ़ी हुई क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिला बढ़ावा आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बढ़िया है।”

 ग्लोबल स्पेस मार्केट में इसरो की बढ़ती ‘धाक’

यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिका की AST स्पेसमोबाइल के बीच एक बड़े कमर्शियल समझौते का हिस्सा है। यह LVM3 रॉकेट की छठी सफल उड़ान थी। इससे पहले यही रॉकेट चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वन वेब (OneWeb) के 72 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक लॉन्च कर चुका है। अब 6.5 टन के इस भारी-भरकम सैटेलाइट को 520 किमी की ऊंचाई पर सटीक स्थापित कर इसरो ने साबित कर दिया है कि वह ‘हैवी-लिफ्ट’ लॉन्चिंग में दुनिया की सबसे विश्वसनीय एजेंसी है।

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