Mathura News: शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद की बड़ी मांग; ‘जनप्रतिनिधि गीता-रामायण पर हाथ रखकर लें शपथ’

शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद की बड़ी मांग

यूनिक समय, मथुरा। न्यूयॉर्क के मेयर पद के लिए जोहरान ममदानी द्वारा कुरान पर हाथ रखकर शपथ लिए जाने के बाद भारत में भी शपथ की प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। इस वैश्विक घटनाक्रम के बीच गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ महाराज ने पुरजोर तरीके से मांग की है कि भारत के जनप्रतिनिधियों को भी श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण जैसे पवित्र ग्रंथों पर हाथ रखकर शपथ लेनी चाहिए। मथुरा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस बदलाव को देश की सांस्कृतिक पहचान और नैतिकता के लिए अनिवार्य बताया।

शंकराचार्य का तर्क

शंकराचार्य ने इस मांग के पीछे एक गहरा संवैधानिक और दार्शनिक तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान समय और परिस्थितियों के अनुसार बदला जाता रहा है और इसमें अब तक अनगिनत संशोधन किए जा चुके हैं। लेकिन हमारे धर्मग्रंथ ‘अपौरुषेय’ और शाश्वत हैं, जो हजारों वर्षों से अपरिवर्तनीय हैं।

पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद के अनुसार, जब कोई जनप्रतिनिधि पवित्र ग्रंथों की शपथ लेगा, तो उसमें ईश्वर के प्रति भय और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव अधिक गहराई से पैदा होगा। यह कदम शासन में शुचिता और ईमानदारी लाने में सहायक सिद्ध होगा।

न्यूयॉर्क की घटना का दिया हवाला

स्वामी अधोक्षजानंद ने न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब विकसित देशों में लोग अपनी आस्था और धर्म के अनुसार शपथ ले सकते हैं, तो भारत में अपनी मूल संस्कृति का सम्मान करने में संकोच कैसा? उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत हिंदुओं का देश है और यहां की संस्कृति की जड़ें इन पवित्र ग्रंथों में समाहित हैं। रामायण और गीता केवल धार्मिक पुस्तकें नहीं हैं, बल्कि ये न्यायप्रियता और आदर्श जीवन जीने का एक संपूर्ण दर्शन हैं।

सांस्कृतिक पहचान

शंकराचार्य के इस बयान ने देश के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग शंकराचार्य का समर्थन कर रहा है, जिनका मानना है कि इससे नेताओं के मन में अपने पद की गरिमा के प्रति अधिक सम्मान पैदा होगा। यह मांग ऐसे समय में आई है जब देश में अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने की मुहिम तेज है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि इन ग्रंथों पर शपथ लेना भारत की वैश्विक पहचान को और अधिक गौरवशाली बनाएगा।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: UP News: सीएम योगी का बड़ा फैसला, 5 जनवरी तक 12वीं तक के सभी स्कूल बंद; रैन बसेरों को लेकर सख्त निर्देश

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*