
यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय खेल जगत से एक बेहद विचलित करने वाली और शर्मनाक खबर सामने आई है। नेशनल पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज पर 17 वर्षीय नेशनल लेवल की महिला निशानेबाज खिलाड़ी के साथ यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए फरीदाबाद पुलिस ने आरोपी कोच के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट सहित अन्य संगीन धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। इस घटना के सार्वजनिक होते ही भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंकुश भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
पीड़ित नाबालिग शूटर ने अपनी शिकायत में बताया कि वह पिछले साल अगस्त से अंकुश भारद्वाज के सानिध्य में प्रशिक्षण ले रही थी। इस घृणित घटना से वह गहरे सदमे में थी और अंततः 1 जनवरी को उसने साहस जुटाकर अपनी मां को पूरी बात बताई, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। एनआरएआई के सचिव राजीव भाटिया ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि अंकुश भारद्वाज को नैतिक आधार पर निलंबित किया गया है और उन्हें ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया जाएगा। जांच पूरी होने और खुद को निर्दोष साबित करने तक वे किसी भी कोचिंग गतिविधि का हिस्सा नहीं बन सकेंगे।
विवादों से पुराना नाता और संदिग्ध करियर
अंकुश भारद्वाज का विवादों से यह पहला सामना नहीं है। इससे पहले साल 2010 में भी उनके करियर पर उस समय दाग लगा था जब उन्हें ‘बीटा-ब्लॉकर’ (प्रतिबंधित दवा) के इस्तेमाल के लिए डोपिंग प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था। बावजूद इसके, साल 2024 के पेरिस ओलंपिक के लिए एनआरएआई ने 37 सदस्यीय कोचिंग टीम में उनके नाम की सिफारिश की थी, जिसके बाद भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने उन्हें नेशनल कोच नियुक्त किया था। अब ओलंपिक स्तर के कोच पर लगे इस कलंक ने खेल प्रशासन की चयन प्रक्रिया और महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारतीय खेल जगत महिला एथलीटों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहा है। खेल प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों ने इस मामले में कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है ताकि भविष्य में कोई भी कोच अपने पद और गरिमा का दुरुपयोग करने का दुस्साहस न कर सके।
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