
यूनिक समय, नई दिल्ली। बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित परिवार ‘लालू कुनबे’ से एक बड़ी सुखद खबर सामने आ रही है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित ‘दही-चूड़ा भोज’ में शामिल हुए। यह मुलाकात इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि पिछले साल एक सोशल मीडिया विवाद और विधानसभा चुनाव 2025 में अलग राह पकड़ने के बाद, पिता-पुत्र के बीच लंबे समय से बातचीत बंद थी।
तस्वीर विवाद और बगावत के बाद पहली ‘घर वापसी’
बता दें कि एक लड़की के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल होने के बाद तेज प्रताप यादव को काफी विवादों का सामना करना पड़ा था। इसके बाद लालू यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए तेज प्रताप को राजद और लालू परिवार से बाहर कर दिया था। इस अलगाव के बाद तेज प्रताप ने अपना पुराना घर छोड़ दिया और एक अलग आवास में रहने लगे। उन्होंने अपनी नई पार्टी का गठन किया और 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव राजद के खिलाफ जाकर लड़ा, हालांकि उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक लालू यादव और तेज प्रताप के बीच सार्वजनिक मंचों पर कोई संवाद नहीं देखा गया।
माता-पिता का लिया आशीर्वाद
रिश्तों में सुधार की पटकथा 13 जनवरी को ही लिख दी गई थी, जब तेज प्रताप ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने बताया कि वह 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर अपनी मां राबड़ी देवी और पिता लालू यादव से मिले और उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव से भी मुलाकात की और अपनी भतीजी कात्यायनी के साथ बिताए पलों को ‘अद्भुत’ बताया। इसी मुलाकात में उन्होंने आज के ‘दही-चूड़ा भोज’ का निमंत्रण दिया था।
मामा साधु यादव की मौजूदगी ने बढ़ाई रौनक
तेज प्रताप यादव के इस विशेष ‘दही-चूड़ा भोज’ में कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं। बिहार के राज्यपाल भी इस भोज का हिस्सा बने, जिससे इस कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया। लंबे समय से परिवार से दूर चल रहे मामा साधु यादव भी भांजे के घर पहुंचे, हालांकि उनके पहुंचने से पहले लालू यादव वहां से प्रस्थान कर चुके थे।
क्या फिर एक होगा लालू परिवार?
सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या यह महज एक त्योहार का मिलन है या फिर तेज प्रताप की राजद में दोबारा वापसी की तैयारी? विधानसभा चुनाव में हार के बाद तेज प्रताप का नरम रुख और लालू यादव का उनके घर पहुंचना इस बात का संकेत है कि परिवार अब पुरानी कड़वाहट को भुलाकर एकजुट होना चाहता है।
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