
यूनिक समय, नई दिल्ली। महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों (16 जनवरी 2026) ने राज्य की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। देश की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित 23 से अधिक निकायों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन (महायुति) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही मुंबई नगर निगम पर पिछले करीब तीन दशकों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का एकछत्र राज समाप्त हो गया है।
बीजेपी बनी राज्य की नंबर-1 शक्ति
29 नगर निगम के अब तक के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 910 सीटों के साथ राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी अपनी पकड़ मजबूत करते हुए 213 सीटों पर जीत दर्ज की है। विशेष रूप से मुंबई (BMC) में भाजपा 88 और शिंदे सेना 31 वार्डों में आगे है, जिससे इस गठबंधन ने 114 के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है।
कांग्रेस का विरोधाभासी प्रदर्शन
कांग्रेस की स्थिति इस चुनाव में काफी दिलचस्प रही है। मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे बड़े महानगरों में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है (मुंबई और पुणे में महज 5-5 सीटें), लेकिन राज्य के कुल आंकड़ों में वह 171 सीटों के साथ तीसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। कांग्रेस ने लातूर (39/51 सीटें), अमरावती और चंद्रपुर में शानदार जीत हासिल की है। कुल सीटों के मामले में कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और शरद पवार की एनसीपी को पीछे छोड़ दिया है, जो भविष्य के लिए क्षेत्रीय दलों के लिए खतरे की घंटी है।
क्षेत्रीय क्षत्रपों का गिरता ग्राफ
उद्धव और राज ठाकरे के एक साथ आने के बावजूद वे मुंबई में भाजपा-शिंदे गठबंधन के विजय रथ को नहीं रोक सके। हालांकि, मुंबई में शिवसेना (UBT) 63 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन सत्ता हाथ से निकल गई है। एनसीपी के भीतर की लड़ाई में अजीत पवार गुट अपने चाचा शरद पवार से कहीं अधिक प्रभावी नजर आया। शरद पवार का प्रभाव अब पुणे और पश्चिम महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक ही सिमटता दिख रहा है।
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