
यूनिक समय, नई दिल्ली। बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसक वारदातों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। ब्रिटिश संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में यह मुद्दा बेहद आक्रामक तरीके से उठाया गया, जिसके बाद ब्रिटेन सरकार ने ढाका की अंतरिम सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। यूके ने बांग्लादेश में हो रहे “सभी हिंसक कृत्यों” की सख्त निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि मानवाधिकारों का हनन और धार्मिक आधार पर उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ब्रिटिश संसद में उठा हिंदुओं की हत्या का मुद्दा
विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद और ब्रिटिश हिंदुओं के लिए ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) के अध्यक्ष बॉब ब्लैकमैन ने बांग्लादेश की “विनाशकारी स्थिति” पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सदन को बताया कि वह हिंदुओं की हत्या और उनके मंदिरों को जलाए जाने की घटनाओं से स्तब्ध हैं। ब्लैकमैन ने कहा कि सड़कों पर हिंदू पुरुषों की बेरहमी से हत्या की जा रही है, उनके घर फूँके जा रहे हैं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक भी इसी खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने लेबर सरकार से मांग की कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर सवाल
बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले चुनावों को लेकर भी ब्रिटेन ने अपनी चिंता जाहिर की है। सांसद ब्लैकमैन ने इशारा किया कि जिस अवामी लीग को 30 प्रतिशत जनता का समर्थन प्राप्त है, उसे चुनाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ इस्लामिक चरमपंथी बांग्लादेश के संविधान को बदलने के लिए जनमत संग्रह की मांग कर रहे हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा है। इसके जवाब में सरकार की ओर से एलन कैंपबेल ने कहा कि ब्रिटेन एक “शांतिपूर्ण और विश्वसनीय” चुनाव प्रक्रिया का समर्थन करता है और अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस) से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के वचनों को निभाने का आग्रह करता है।
प्रीति पटेल और ब्रिटिश हिंदू समूहों का दबाव
यह हस्तक्षेप पूर्व गृह सचिव प्रीति पटेल द्वारा विदेश सचिव यवेट कोपर को लिखे गए पत्र के एक सप्ताह बाद आया है। भारतीय मूल की सांसद प्रीति पटेल ने साफ कहा कि बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा होनी चाहिए और हिंदुओं का उत्पीड़न तुरंत रुकना चाहिए। वहीं, लंदन की सड़कों पर भी ‘बंगाली हिंदू आदर्श संघ’ (BHAS) के नेतृत्व में भारी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने इस्कॉन से जुड़े चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और दीपू दास की सार्वजनिक लिंचिंग जैसे मामलों पर ढाका सरकार की चुप्पी की कड़ी आलोचना की है।
ब्रिटेन सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह विदेश, विकास एवं राष्ट्रमंडल कार्यालय (FCDO) के माध्यम से इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए है और उचित समय पर एक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।
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