
यूनिक समय, नई दिल्ली। काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के पुनरुद्धार और वहां चल रहे विवादों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वाराणसी दौरा चर्चा का विषय बन गया है। शनिवार को सीएम योगी ने बाबा विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर में हाजिरी लगाई और सर्किट हाउस में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, लेकिन प्रशासन की तमाम तैयारियों के बावजूद वे मणिकर्णिका घाट नहीं पहुंचे। रेड कार्पेट और सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच मुख्यमंत्री का घाट पर न जाना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा और कौतूहल का केंद्र बन गया है।
कांग्रेस पर प्रहार
सर्किट हाउस में मीडिया से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास भारत की सनातन आस्था को अपमानित करने का रहा है। सीएम ने आरोप लगाया कि जब काशी विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है, तब कांग्रेस मठ-मंदिरों से जुड़े विवादित मुद्दे उठाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई के सम्मान को ठेस पहुंचाने का काम सरकार नहीं, बल्कि वे लोग कर रहे हैं जो विकास में अड़ंगे लगा रहे हैं। योगी ने याद दिलाया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के वक्त भी ऐसा ही विरोध हुआ था, लेकिन आज वही विरोधी वहां जाकर बाबा का आशीर्वाद ले रहे हैं।
रेड कार्पेट बिछा रह गया, पर सीएम नहीं पहुंचे घाट
मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई की प्रतिमा और कथित तोड़फोड़ के वायरल वीडियो ने माहौल पहले ही गरमा रखा है। सीएम के संभावित निरीक्षण को देखते हुए जिला प्रशासन ने सतुआ बाबा आश्रम से घाट तक रेड कार्पेट बिछाया था और सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। सुबह से ही यातायात प्रतिबंधित था और भारी पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, इन भारी-भरकम तैयारियों के बाद भी मुख्यमंत्री का काफिला घाट की तरफ नहीं मुड़ा, जिसके बाद विपक्ष इसे विवादों से बचने की रणनीति करार दे रहा है।
सियासी माहौल और घाट का विवाद
बता दें कि मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस और कुछ स्थानीय संगठनों ने मोर्चा खोल रखा है। प्रतिमा और मढ़ी के साथ छेड़छाड़ के आरोपों ने इस मुद्दे को भावनात्मक और राजनीतिक बना दिया है। ऐसे में सीएम का घाट पर न जाना यह संकेत देता है कि सरकार फिलहाल इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे टकराव के बजाय काम को शांति से पूरा करने और विरोधियों को तर्कों से जवाब देने की नीति पर चल रही है।
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