Karnataka: ‘आपत्तिजनक’ वीडियो वायरल होने के बाद DGP रामचंद्र राव सस्पेंड; CM सिद्धारमैया ने लिया कड़ा एक्शन

DGP Ramachandra Rao suspended

यूनिक समय, नई दिल्ली। कर्नाटक पुलिस विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब डीजीपी (DGP) रैंक के वरिष्ठ अधिकारी रामचंद्र राव का एक कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद राज्य की सिद्धारमैया सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रामचंद्र राव, सोना तस्करी की आरोपी रान्या राव के पिता हैं।

वीडियो में क्या है? जिसे देख नाराज हुए मुख्यमंत्री

वायरल वीडियो में कथित तौर पर डीजीपी रामचंद्र राव को उनके कार्यालय के भीतर वर्दी पहने हुए अलग-अलग महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया है। वीडियो में राव को महिलाओं को गले लगाते और किस करते हुए देखा जा सकता है।
सूत्रों का मानना है कि ये दृश्य डीजीपी कार्यालय के अंदर गुप्त रूप से रिकॉर्ड किए गए हैं। वीडियो में अलग-अलग मौकों पर विभिन्न परिधानों में महिलाएं नजर आ रही हैं। हालांकि, अब तक इस मामले में किसी भी तरह की जबरदस्ती या उत्पीड़न के आरोप सामने नहीं आए हैं।

इस घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी और पुलिस महकमे के भीतर अनुशासन की ऐसी स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।

रामचंद्र राव का पक्ष

निलंबित अधिकारी रामचंद्र राव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। राव ने दावा किया है कि यह वीडियो पूरी तरह से झूठा, मनगढ़ंत और ‘मॉर्फ्ड’ (छेड़छाड़ किया हुआ) है। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और वे इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, वह 8 साल पहले बेलगावी में तैनात थे और यह पुराना मामला उन्हें फंसाने की साजिश है। राव ने मांग की है कि बिना निष्पक्ष जांच के ऐसे वीडियो को सही नहीं माना जाना चाहिए।

बढ़ता राजनीतिक दबाव

सोना तस्करी मामले में बेटी का नाम आने और अब खुद डीजीपी के इस कथित वीडियो ने कर्नाटक सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया था। विपक्ष के हमलों और बढ़ते जन आक्रोश के बीच सरकार ने इस सख्त कदम के जरिए संदेश देने की कोशिश की है। इस विवाद के बीच राव ने गृह मंत्री से भी मुलाकात कर अपना पक्ष रखा था, लेकिन मुख्यमंत्री के आदेश के बाद उन्हें राहत नहीं मिल सकी।

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