
यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया की कूटनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। ग्रीनलैंड को खरीदने या उस पर अधिकार जताने की अपनी पुरानी महत्वाकांक्षा को उन्होंने अब एक नई और आक्रामक दिशा दे दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है, जिसने डेनमार्क और पूरे यूरोप में हड़कंप मचा दिया है। इस तस्वीर में ट्रंप खुद को ग्रीनलैंड की बर्फीली जमीन पर अमेरिकी झंडा गाड़ते हुए दिखा रहे हैं, साथ ही उनके साथ उप-राष्ट्रपति जेडी वेन्स और विदेश मंत्री मार्क रुबियो भी नजर आ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात तस्वीर में लगा एक बोर्ड है, जिस पर लिखा है: “ग्रीनलैंड- यूएस क्षेत्र- स्थापित (EST) 2026″।
नक्शे से बदली दुनिया की सरहदें
ट्रंप की यह दावेदारी केवल एक तस्वीर तक सीमित नहीं है। उन्होंने एक नक्शा भी साझा किया है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। गौरतलब है कि पिछले साल ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का सुझाव दिया था, जिसे कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ‘हकीकत और इच्छा का अंतर’ बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था। अब 2026 के इस ताजा दावे ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारी तनाव पैदा कर दिया है।
ग्रीनलैंड में NORAD की तैनाती
बयानों और तस्वीरों के बीच अमेरिका ने अब सैन्य कदम उठाना भी शुरू कर दिया है। अमेरिका ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस पर एक नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) विमान तैनात करने जा रहा है। हालांकि NORAD का दावा है कि यह एक पूर्व-नियोजित गतिविधि है और डेनमार्क के साथ समन्वय में की जा रही है, लेकिन ट्रंप की धमकियों के बीच इस कदम को ग्रीनलैंड पर अमेरिकी पकड़ मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे ट्रंप ने ‘विश्व सुरक्षा के लिए अभिन्न’ बताया है।
यूरोप की चिंता और डेनमार्क का रुख
ट्रंप के इस ‘डिजिटल आक्रमण’ ने डेनमार्क और नाटो सहयोगियों को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। ट्रंप ने हाल ही में नाटो महासचिव मार्क रुट्टे से फोन पर बात कर ग्रीनलैंड पर अपने रुख को दोहराया है और कहा है कि वे दावोस में इस मुद्दे पर कई पक्षों से मिलेंगे। डेनमार्क इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा प्रहार मान रहा है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह रवैया न केवल आर्कटिक क्षेत्र की शांति को भंग कर सकता है, बल्कि अमेरिका और उसके सबसे पुराने यूरोपीय सहयोगियों के बीच एक बड़ी दरार भी पैदा कर सकता है।
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