Noida Mall Tragedy: मुख्यमंत्री का कड़ा प्रहार, CEO लोकेश एम की छुट्टी और बिल्डर गिरफ्तार; SIT ने संभाली जांच की कमान

Chief Minister removes CEO Lokesh M

यूनिक समय, नई दिल्ली। नोएडा के सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में जलभराव के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस घटना से उपजे भारी जन-आक्रोश और व्यवस्था की खामियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।

मुख्यमंत्री का कड़ा प्रहार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। शासन की इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि विकास कार्यों में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और गहन पड़ताल के लिए सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है जिसका नेतृत्व एडीजी जोन मेरठ कर रहे हैं। इस उच्चस्तरीय टीम में मेरठ की मंडलायुक्त और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को भी शामिल किया गया है।

एसआईटी ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय में करीब दो घंटे तक दस्तावेजों की पड़ताल की और इसके बाद सीधे उस घटनास्थल का दौरा किया जहां यह भीषण हादसा हुआ था। एसआईटी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट महज पांच दिनों के भीतर सौंपने के निर्देश दिए गए हैं जिसमें हादसे के कारणों के साथ-साथ दोषी अधिकारियों और विभागों की भूमिका का निर्धारण किया जाएगा।

हादसे की भयावहता का अंदाजा मृतक इंजीनियर युवराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लगाया जा सकता है जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार युवराज के फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी भरा हुआ पाया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि कार के गड्ढे में गिरने के बाद वह काफी देर तक पानी और दलदल के बीच संघर्ष करते रहे। पानी फेफड़ों में भर जाने से ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई जिससे दम घुटने और अत्यधिक दबाव के कारण हार्ट फेलियर होने से उनकी मृत्यु हो गई। इस बीच पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एमजेड विजटाउन के मालिक और बिल्डर अभय कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया है।

एसआईटी अब उन तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है कि आखिर निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा घेरा और चेतावनी संकेत क्यों नहीं थे। इसके साथ ही क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की विफलता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का आरोप

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जलभराव और असुरक्षित निर्माण को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं लेकिन प्राधिकरण ने उन्हें अनसुना कर दिया। शासन की इस कार्रवाई के बाद अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अन्य निर्माण स्थलों पर भी सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में युवराज जैसी किसी और बेगुनाह की जान न जाए।

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