मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी; उदयनिधि स्टालिन का बयान ‘हेट स्पीच’ और ‘सांस्कृतिक नरसंहार’ का संकेत

Madras High Court makes strong remarks on Udhayanidhi Stalin's statement

यूनिक समय, नई दिल्ली। तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा ‘सनातन धर्म’ को लेकर दिए गए विवादित बयान पर मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक और बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि उदयनिधि का बयान ‘हेट स्पीच’ (नफरती भाषण) के दायरे में आता है और यह एक तरह से ‘सांस्कृतिक नरसंहार’ का संकेत देता है। इसके साथ ही, जस्टिस एस. श्रीमथी की पीठ ने बीजेपी नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज उस एफआईआर (FIR) को भी रद्द कर दिया, जो स्टालिन के बयान पर प्रतिक्रिया देने के कारण दर्ज की गई थी।

“सनातन को मिटाना” विरोध नहीं, अस्तित्व पर हमला

हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि उदयनिधि द्वारा इस्तेमाल किया गया तमिल शब्द “Sanathana Ozhippu” का अर्थ केवल विरोध करना नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह से जड़ से मिटाना है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब कोई सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया या कोरोना जैसी बीमारियों से करता है और उसे खत्म करने का आह्वान करता है, तो यह उस धर्म को मानने वाले करोड़ों लोगों के अस्तित्व पर सवाल उठाने जैसा है। जस्टिस श्रीमथी ने कहा, “यह दुखद है कि हेट स्पीच देने वाले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उस पर प्रतिक्रिया देने वाले को कानूनी प्रक्रिया में घसीट लिया गया।”

कोर्ट के चार बड़े और कड़े प्रहार

मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में बेहद कड़े तेवर अपनाते हुए चार महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं, जो देश में हेट स्पीच और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच की सीमा को स्पष्ट करती हैं। अदालत ने कहा कि आज की स्थिति में यह विडंबना है कि कानून का दुरुपयोग इस तरह हो रहा है कि नफरती भाषण (हेट स्पीच) शुरू करने वाले तो सुरक्षित बच निकलते हैं, लेकिन उन पर सवाल उठाने वालों को ही कानूनी प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। कोर्ट ने हेट स्पीच की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि सनातन धर्म को खत्म करने का आह्वान करना किसी साधारण विरोध का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े समुदाय की आस्था पर सीधा प्रहार है जो स्पष्ट रूप से हेट स्पीच की श्रेणी में आता है।

सबसे गंभीर टिप्पणी नरसंहार के संकेत को लेकर रही, जिसमें जस्टिस श्रीमथी ने कहा कि किसी विशिष्ट धर्म या संस्कृति को पूरी तरह मिटाने की बात करना ‘सांस्कृतिक नरसंहार’ (Cultural Genocide) की मंशा को दर्शाता है। अंत में, कोर्ट ने अमित मालवीय पर दर्ज FIR को गलत ठहराते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक मंत्री के सार्वजनिक और विवादित बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी, जिस आधार पर उन पर आपराधिक मुकदमा चलाना न्यायसंगत नहीं है।

क्या था पूरा विवाद?

सितंबर 2023 में एक कार्यक्रम के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि “सनातन धर्म मच्छर, डेंगू और मलेरिया जैसा है, जिसे केवल विरोध करके नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि इसे खत्म करना अनिवार्य है।” इस बयान के बाद देश भर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस बयान का वीडियो साझा करते हुए सवाल किया था कि क्या यह देश की 80% आबादी के नरसंहार का आह्वान है। इसके जवाब में द्रमुक (DMK) समर्थकों ने मालवीय पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करा दिया था।

गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी उदयनिधि को फटकार लगाते हुए कहा था कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए और उन्हें अपने बयानों के गंभीर परिणामों का अंदाजा होना चाहिए।

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