
यूनिक समय, मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन में बसंत पंचमी के पावन पर्व के साथ ही विश्व प्रसिद्ध 40 दिवसीय ब्रज होली का विधिवत शंखनाद हो गया है। समूचे ब्रजमंडल में ‘फाग’ की आहट सुनाई देने लगी है और मंदिरों में भक्ति व उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में शुमार ठाकुर राधा रमण लाल और राधावल्लभ मंदिर में बसंत का ऐसा रंग चढ़ा कि देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु बसंती छटा में सराबोर नजर आए।
बसंती आभा में निखरा ठाकुर जी का स्वरूप
प्राचीन ठाकुर राधा रमण मंदिर में बसंत पंचमी का उत्सव बड़े ही भव्य तरीके से मनाया गया। इस विशेष अवसर पर ठाकुर जी ने रत्नजड़ित पीले रंग की पोशाक (बसंती वस्त्र) धारण की। मंदिर के गर्भगृह को पीले फूलों और कपड़ों से इस कदर सजाया गया था कि मानो साक्षात बसंत ऋतु ने वहां डेरा डाल लिया हो। अपने आराध्य के इस मनमोहक और दिव्य रूप के दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए। सुबह से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा परिसर ‘राधे-राधे’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
अबीर-गुलाल के साथ होली का आगाज
ब्रज की प्राचीन परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ही होली का डांढ़ा गाड़ दिया जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि अब ब्रज में रंगों की बौछार शुरू हो गई है। ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में सेवायतों ने सबसे पहले ठाकुर जी के चरणों में अबीर और गुलाल अर्पित किया। इसके पश्चात जैसे ही प्रसादी गुलाल हवा में उड़ाया गया, मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। भक्तों पर उड़ते गुलाबी और लाल गुलाल ने यह संदेश दिया कि अब अगले 40 दिनों तक ब्रज की कुंज गलियां रंगों और आनंद के सागर में डूबी रहेंगी।
श्रद्धालुओं का अनुभव
दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर था। भक्तों का कहना था कि वृंदावन की बसंत पंचमी का आध्यात्मिक अनुभव शब्दों में बयान करना मुश्किल है। एक श्रद्धालु ने भावुक होकर बताया कि ठाकुर जी के पीले स्वरूप के दर्शन और माथे पर प्रसादी गुलाल का टीका लगने के बाद ऐसा महसूस हो रहा है मानो वे स्वयं भी इस बसंती रंग में रंग गए हों। ब्रज के सभी सात देवालयों समेत अन्य मठ-मंदिरों में भी इस दिन विशेष समाज गायन और बसंती भोग का आयोजन किया गया।
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