
यूनिक समय, नई दिल्ली। आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के आगाज से महज 15 दिन पहले क्रिकेट जगत में बड़ा भूचाल आ गया है। सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर भारत में खेलने से इनकार करने वाले बांग्लादेश (BCB) की आखिरी उम्मीदें भी अब धराशायी होती नजर आ रही हैं। आईसीसी के चेयरमैन जय शाह आज यानी 24 जनवरी (शनिवार) को बांग्लादेश की भागीदारी पर औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को मुख्य टूर्नामेंट में शामिल करने के लिए स्टैंडबाय पर रखा जा चुका है।
DRC का दांव भी पड़ा खाली
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने अंतिम कोशिश के तौर पर आईसीसी की विवाद समाधान कमेटी (DRC) का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, आईसीसी संविधान के क्लॉज 1.3 के अनुसार, DRC के पास आईसीसी बोर्ड के फैसलों के खिलाफ अपील सुनने का कानूनी अधिकार ही नहीं है। आईसीसी बोर्ड पहले ही 14-2 के भारी बहुमत से भारत में मैचों के आयोजन को मंजूरी दे चुका है। ऐसे में कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का यह दांव शुरू से ही कमजोर था।
240 करोड़ रुपये का भारी नुकसान
अगर बांग्लादेश टूर्नामेंट से बाहर होता है, तो उसे सिर्फ खेल का ही नहीं बल्कि भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ेगा। ब्रॉडकास्टिंग राइट्स, स्पॉन्सरशिप और आईसीसी रेवेन्यू को मिलाकर बांग्लादेश के करीब 240 करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं। एक स्वतंत्र सुरक्षा एजेंसी ने भारत में खतरे के स्तर को ‘कम से मध्यम’ बताया था, लेकिन बांग्लादेश सरकार और बोर्ड के अड़ियल रुख ने स्थिति को बेकाबू कर दिया।
विवाद की जड़
यह पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब सुरक्षा कारणों के चलते बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के स्क्वॉड से हटाया गया। इसके बाद बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अंतिम फैसला सरकार लेगी। आईसीसी बोर्ड के सदस्य तब और नाराज हो गए जब बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ‘बुलबुल’ ने आईसीसी को औपचारिक जानकारी देने से पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी।
ICC की घोषणा पर टिकी दुनिया की नजरें
वर्तमान में आईसीसी चेयरमैन जय शाह दुबई में मौजूद हैं, जहाँ टी20 वर्ल्ड कप की तैयारियों को लेकर अंतिम समीक्षा की जा रही है। स्कॉटलैंड की टीम पूरी तरह तैयार है और उसे किसी भी समय आधिकारिक बुलावा भेजा जा सकता है। अगर आज बांग्लादेश के निलंबन या बाहर होने की घोषणा होती है, तो यह क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े प्रशासनिक विवादों में से एक होगा।
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