
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए हालिया विवाद ने धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है। इस संवेदनशील मुद्दे पर योगगुरु बाबा रामदेव ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए सनातनियों को एकजुट रहने की चेतावनी दी है।
गोवा में मीडिया से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने चिंता जताई कि जब देश विरोधी और सनातन विरोधी ताकतें वैश्विक स्तर पर सक्रिय हैं, ऐसे में हिंदू समुदाय और संतों का आंतरिक कलह में उलझना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत के बाहर कई ऐसे तत्व हैं जो देश का इस्लामीकरण या ईसाईकरण करने का सपना देख रहे हैं और गजवा-ए-हिंद जैसी विचारधाराओं को बढ़ावा दे रहे हैं, इसलिए घर के भीतर की लड़ाई इन बाहरी दुश्मनों को और मजबूत बनाती है।
बाबा रामदेव ने साधुता की परिभाषा समझाते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार और अभिमान को नहीं मिटा सका, वह वास्तव में साधु कहलाने का अधिकारी नहीं है। प्रयागराज जैसे पावन तीर्थ स्थान पर स्नान या पालकी जैसे विषयों को लेकर होने वाले विवादों को उन्होंने मर्यादा के खिलाफ बताया।
रामदेव के अनुसार शंकराचार्य भगवान शंकर के साक्षात विग्रह स्वरूप हैं, अतः उनसे और अन्य सभी पूजनीय संतों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी प्रकार के विवाद का हिस्सा न बनें। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर योगी और संत को अपने गौरव और गरिमा की रक्षा स्वयं करनी चाहिए और ऐसा कोई भी व्यवहार स्वीकार्य नहीं है जो किसी संत की गरिमा को ठेस पहुँचाए।
गौ-रक्षा के मुद्दे पर बाबा रामदेव ने संतों और विशेषकर शंकराचार्यों को कर्मठ होने की सलाह दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि गायों को केवल नारों और बयानों से नहीं बचाया जा सकता, बल्कि इसके लिए धरातल पर सेवा की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक बड़े संत और आश्रम को कम से कम पांच से दस हजार गायों के पालन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। पतंजलि पीठ का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनका संस्थान वर्तमान में एक लाख गायों की देखभाल कर रहा है, और यदि सभी पूजनीय संत इसी तरह आगे आएं तो गौ-माता की स्थिति में वास्तविक सुधार होगा।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी रामदेव ने संतों को संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कुछ देश विरोधी तत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। ऐसे समय में संतों को अपने मन में सरकार या राजनेताओं के प्रति नाराजगी पालने के बजाय राष्ट्रहित में मिलकर काम करना चाहिए।
नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Leave a Reply