Fri, Jun 5th, 2026
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UP: UGC के नए नियमों पर मायावती का बड़ा बयान; दलितों-पिछड़ों को भड़काऊ राजनीति से बचने की दी सलाह

by Tarun Bhardwaj • January 28, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। देशभर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर मचे घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। जहाँ एक ओर सवर्ण वर्ग के कई संगठन इन नियमों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं, वहीं मायावती ने इन नियमों का पक्ष लेते हुए इसे उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उन्होंने विरोध करने वालों को ‘जातिवादी मानसिकता’ का शिकार करार देते हुए दलितों और पिछड़ों को स्वार्थी नेताओं के बहकावे में न आने की चेतावनी दी है।

‘इक्विटी कमेटी’ का समर्थन

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में ‘इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने का निर्णय उच्च शिक्षा में व्याप्त जातिवादी भेदभाव को खत्म करने के लिए जरूरी है। उन्होंने लिखा “उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के समाधान हेतु यूजीसी के नए नियमों का विरोध करना कतई उचित नहीं है। केवल जातिवादी मानसिकता के लोग ही इसे अपने विरुद्ध षडयंत्र मान रहे हैं।”

सामाजिक तनाव पर सरकार को नसीहत

नियमों का समर्थन करने के साथ ही बसपा प्रमुख ने केंद्र सरकार और संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि इन नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाता, तो आज देशभर में विरोध प्रदर्शन और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने भविष्य में ऐसी संवेदनशील नीतियों पर पारदर्शिता बरतने की अपील की।

दलितों और पिछड़ों के लिए विशेष अपील

मायावती ने दलितों, पिछड़ों और वंचितों को ‘बिकाऊ और स्वार्थी’ नेताओं से सावधान रहने की कड़ी हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि कुछ नेता इन वर्गों की भावनाओं को भड़काकर अपनी ‘घिनौनी राजनीति’ चमकाने का प्रयास करते हैं। मायावती ने अपील की कि इन वर्गों के लोग किसी भी भड़काऊ बयान के बहकावे में न आएं और अपनी बुद्धिमत्ता से काम लें।

क्या है विवाद की जड़?

UGC के नए नियमों के तहत संस्थानों में समता समिति बनाने का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य आरक्षित वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकना है। सवर्ण वर्ग के संगठनों का तर्क है कि ये नियम सामान्य वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण हैं और इससे संस्थानों का शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा। इसी नाराजगी के चलते यूपी सहित कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

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