Shankaracharya Controversy: मथुरा के तीर्थ पुरोहितों ने खोला मोर्चा; कहा “बिना स्नान वापसी सनातन का अपमान…”

The priests of Mathura have launched a protest

यूनिक समय, मथुरा।  प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और उनके बिना स्नान किए लौटने के मामले ने अब देशभर के संत और पुरोहितों को आक्रोशित कर दिया है। इसी क्रम में कृष्ण नगरी मथुरा में अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा और माथुर चतुर्वेद परिषद ने एकजुट होकर शासन-प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। एक संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान संस्थाओं ने इसे सीधे तौर पर सनातन परंपरा का अपमान और गहरी साजिश करार दिया।

“सोची-समझी साजिश का परिणाम” — महेश पाठक

संस्था के मुख्य संरक्षक महेश पाठक ने कड़े शब्दों में सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जिस तरह से शंकराचार्य के साथ व्यवहार किया गया, वह देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है। उन्होंने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतिहास में पहली बार किसी शंकराचार्य को माघ मेले जैसी पावन स्थली से बिना संगम स्नान किए भारी मन से लौटना पड़ा। शासन और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे। सरकार का नैतिक दायित्व था कि वह जगतगुरु का सम्मानपूर्वक स्वागत करती और उन्हें ससम्मान स्नान कराती। तीर्थ पुरोहितों ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि राज्य सरकार इस पूरे प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य जी से क्षमा याचना करे।

शंकराचार्य से भेंट करने प्रयागराज जाएगा प्रतिनिधिमंडल

केवल विरोध तक ही सीमित न रहते हुए, दोनों संस्थाओं ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। प्रेस वार्ता में जानकारी दी गई कि दोनों संस्थाएं जल्द ही शंकराचार्य जी के समर्थन में एक औपचारिक पत्र जारी करेंगी। मामले की गहराई को समझने और आगामी मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए माथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी एडवोकेट और महासभा के मंत्री संजय चतुर्वेदी 29 जनवरी को प्रयागराज (शिवपुरी) जाकर शंकराचार्य जी से मुलाकात करेंगे। संस्थाओं ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य जी द्वारा जो भी निर्देश दिए जाएंगे, उनका पालन पूरी निष्ठा और एकजुटता के साथ किया जाएगा।

प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक और प्रेस वार्ता में गिरधारी लाल पाठक, नवीन नागर, लाला पहलवान, शिवकुमार चतुर्वेदी, अनिल पमपम और नीरज चतुर्वेदी सहित ब्रज क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति और पुरोहित समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि धर्म की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

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