
यूनिक समय, नई दिल्ली। दीपावली का पांच दिवसीय महापर्व केवल रोशनी और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्योतिष शास्त्र और पंचांग मानते हैं कि इन पांच दिनों में प्रत्येक दिन एक खास नक्षत्र और उससे जुड़ी ग्रह-ऊर्जा सक्रिय होती है। यदि हम इन ऊर्जाओं को छोटे-छोटे उपायों से जागृत करें, तो यह त्योहार सालभर के लिए स्वास्थ्य, धन, स्थिरता और रिश्तों में सुख-शांति का आधार बन सकता है।
पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है, जिसका संबंध गुरु (बृहस्पति) और शुक्र ग्रह से है, जो धन-वैभव के कारक माने जाते हैं। धन-आरोग्य की चमक के इस दिन पीतल, चाँदी या सोना जैसी धातु खरीदनी चाहिए। हल्दी और पीली वस्तुओं का दान करना गुरु को बढ़ाता है, जबकि धातु का क्रय शुक्र ग्रह को सक्रिय करने में सहायक है। इस दिन 108 बार “ॐ गुरवे नमः” का जाप और संध्या के समय दीपदान करने से धन वृद्धि, आरोग्य और समृद्धि का शुभारंभ होता है।
अगला पर्व नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) मंगल और केतु के संतुलन से जुड़ा है, जो रोग नाशक माना गया है। यह पर्व शौर्य और नकारात्मकता के नाश का प्रतीक है। इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन और तेल से स्नान करने और काली (देवी) आराधना से मंगल-केतु कृपा करते हैं। 21 बार “ॐ ह्रीं श्रीं भीमाय नमः” का जाप करने के साथ, घर के भारी कोनों में तिल के तेल का दीपक जलाना शनि-केतु का संतुलन करता है, जिससे भय दूर होता है, रोगों का नाश होता है और आयु में वृद्धि होती है।
मध्य पर्व दीपावली (अमावस्या) का संबंध शुक्र (सौंदर्य) और चंद्र (मन व भावनाएं) के मेल से है, जो घर में शांति का आमंत्रण देता है। इस दिन घी-तेल से दीप जलाएं, महालक्ष्मी और गणेशजी का पूजन करें। शंखनाद और श्री सूक्त पाठ से बंद शुक्र को बल मिलता है। 108 बार “ॐ शुक्राय नमः” और “ॐ चंद्राय नमः” का जाप करें और घर के पूजा स्थान को पूर्व दिशा में विशेष सजाएं, जिससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि और मानसिक ऐश्वर्य का आमंत्रण मिलता है। इस दिन का नक्षत्र चित्रा है, जिसके अधिपति मंगल हैं।
चौथा दिन गोवर्धन पूजा का है, जो गुरु व शनि के संबल से काम सफल करने वाला पर्व है। यह धर्म, ज्ञान (गुरु) और स्थिरता, परिश्रम (शनि) से संबंधित है। गौ-सेवा, अन्नदान और मिट्टी/पर्वत का पूजन गुरु और शनि को सक्रिय करता है। इस दिन मिट्टी से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजन करें और 56 व्यंजन (छप्पन भोग) का नैवेद्य अर्पित करें। 108 बार “ॐ वृष्ण्यै नमः” का जाप करने से सभी कार्यों की सफलता सुनिश्चित होती है। इस दिन का नक्षत्र स्वाति है, जिसके अधिपति राहु हैं।
पांच दिवसीय पर्व का समापन भाई दूज (द्वितीया) के साथ होता है, जो चंद्र (स्नेह) और बुध (संवाद, बुद्धि) के बंधन से रिश्तों को मजबूत करता है। भाई-बहन इस दिन एक-दूसरे को तिलक करें, साथ भोजन करें और उपहारों का आदान-प्रदान करें। चंद्र को अर्घ्य और केसर का तिलक बुध को बल देता है। भाई शिक्षा/स्वास्थ्य से जुड़ा उपहार दें, और बहनें चंद्रमा को अर्घ्य दें। 108 बार “ॐ बुधाय नमः” का जाप करने से रिश्तों में प्रेम और संवाद में मिठास बढ़ती है। इस दिन का नक्षत्र विशाखा है, जिसके अधिपति गुरु हैं।
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