
यूनिक समय, मथुरा। मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में एक अहम मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज, शुक्रवार को हिंदू पक्ष के उस दावे की जांच करने पर सहमति जताई है, जिसमें कहा गया कि विवादित ढांचा एक एएसआई संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष ने तर्क दिया कि चूंकि यह ढांचा एएसआई द्वारा संरक्षित है, इसलिए इसे मस्जिद के रूप में नमाज के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है और इस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं हो सकता।
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु जैन ने कोर्ट में कहा कि वर्ष 1920 में जब उत्तर प्रदेश ब्रिटिश हुकूमत में था, तब वहां के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने इस मस्जिद को एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया था, और इसलिए इस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 लागू नहीं होता। उनका कहना था कि यह एक्ट किसी भी धार्मिक स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने की अनुमति नहीं देता है।
मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें हिंदू पक्ष को उनके वाद में संशोधन करने और एएसआई को पार्टी बनाने की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश प्रथम दृष्टया सही प्रतीत हो रहा है, क्योंकि हिंदू पक्ष को वाद में संशोधन करने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई नया दावा किया जाता है, तो दूसरे पक्ष को उस पर आपत्ति करने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने श्री कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को तय की है और इसे पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ा है।
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