
यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि एयर इंडिया के क्रैश हुए विमान में एक पायलट ने उड़ान भरने के तुरंत बाद इंजन के फ्यूल सप्लाई को बंद कर दिया था। रिपोर्ट का आधार उस कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर को बताया गया है, जिसमें दोनों पायलटों के बीच अंतिम क्षणों की बातचीत रिकॉर्ड है।
हालांकि भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस रिपोर्ट को लेकर स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती जांच पर आधारित है और अंतिम निष्कर्ष आने तक किसी भी तरह की पुष्टि करना जल्दबाज़ी होगी।
वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे के समय बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान के फर्स्ट ऑफिसर ने अपने सीनियर कैप्टन से पूछा कि उन्होंने टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद फ्यूल कटऑफ स्विच क्यों बंद कर दिए। रिपोर्ट में बताया गया कि इसके बाद फर्स्ट ऑफिसर घबरा गए, जबकि कैप्टन शांत बने रहे।
दुर्घटना में कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर की जान चली गई। दोनों पायलटों के पास क्रमशः 15,638 और 3,403 घंटे का उड़ान अनुभव था। रिपोर्ट के अनुसार टेकऑफ के 32 सेकंड बाद ही विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फ्यूल कटऑफ स्विच गलती से बंद किए गए थे या जानबूझकर। इस मुद्दे पर सुरक्षा विशेषज्ञों और विमानन जानकारों के बीच भी बहस चल रही है।
भारतीय पायलट संघ (फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स) के अध्यक्ष सीएस रंधावा ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसे “बेबुनियाद और भ्रामक” बताया। उन्होंने कहा कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में इस तरह के किसी भी निष्कर्ष का ज़िक्र नहीं है और अंतिम रिपोर्ट के बिना कोई राय नहीं बनाई जानी चाहिए।
नायडू ने भी दोहराया कि जांच पूरी होने तक सभी को संयम बरतना चाहिए और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना चाहिए।
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