
यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदना जारी रखने के कारण 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। इस नए टैरिफ के बाद, कुछ छूट प्राप्त वस्तुओं को छोड़कर, भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ 50% हो जाएगा। यह अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होगा, जबकि 25% का प्रारंभिक टैरिफ 7 अगस्त से लागू हो गया है। ट्रंप ने कई बार कहा है कि रूस से तेल खरीदकर भारत, यूक्रेन युद्ध में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन कर रहा है।
भारतीय निर्यात पर दोहरी मार और प्रतिस्पर्धी देशों को फायदा
टैरिफ बढ़कर 50% होने से भारत के निर्यात पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। कपड़ा, समुद्री उत्पाद और चमड़ा जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इससे भारत, ब्राजील के साथ दुनिया का सबसे अधिक अमेरिकी टैरिफ वाला देश बन जाएगा।
प्रमुख प्रभावित क्षेत्र: वस्त्र/परिधान (10.3 अरब डॉलर), रत्न एवं आभूषण (12 अरब डॉलर), झींगा (2.24 अरब डॉलर), चमड़ा एवं जूते (1.18 अरब डॉलर), पशु उत्पाद, रसायन (2.34 अरब डॉलर) और विद्युत एवं यांत्रिक मशीनरी (9 अरब डॉलर)।
अन्य देशों पर टैरिफ: अमेरिका ने म्यांमार पर 40%, थाईलैंड और कंबोडिया पर 36-36%, बांग्लादेश पर 35%, चीन पर 30% और वियतनाम पर 20% टैरिफ लगाया है।
कम शुल्क होने के कारण इन प्रतिस्पर्धी देशों को अमेरिकी बाजार में भारत से ज्यादा फायदा मिलेगा। इससे भारत के लगभग 86 अरब डॉलर के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया और भारत का रुख
भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने इस कदम को हैरान करने वाला बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका को होने वाले भारत के 55% निर्यात पर असर पड़ेगा। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) ने आशंका जताई है कि निर्यात में 40-50% तक की कमी आ सकती है। समुद्री खाद्य और कपड़ा निर्यातकों ने भी इस फैसले को एक बड़ा झटका बताया है।
दूसरी ओर, भारत ने इस कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकपूर्ण” बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत का ऊर्जा आयात उसके राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
अमेरिका ने भारत पर भले ही अतिरिक्त टैरिफ लगाया हो, लेकिन बातचीत का रास्ता खुला रखा है। कार्यकारी आदेश के अनुसार, अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा, जबकि द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए अमेरिकी टीम 25 अगस्त को भारत आ रही है। यह दिखाता है कि अमेरिका भारत पर दबाव बनाने के साथ-साथ एक समाधान पर पहुंचने की कोशिश भी कर रहा है।
छूट प्राप्त वस्तुएं: कुछ उत्पादों, जैसे दवाएं, ऊर्जा उत्पाद (कच्चा तेल, गैस), महत्वपूर्ण खनिज और इलेक्ट्रॉनिक्स, को इस टैरिफ से बाहर रखा गया है।
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